आरबीआई गवर्नर की बैंकों से अपील, एआई को तेजी से अपनायें

आरबीआई गवर्नर की बैंकों से अपील, एआई को तेजी से अपनायें

मुंबई, 11 अगस्त । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को बैंकों से अपील की कि वे एआई को तेजी से अपनायें और इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचे, प्रतिभा और कौशल में निवेश करें।उद्योग मंडल फिक्की और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) द्वारा आयोजित वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन फीबैक 2026 को संबोधित करते हुए श्री मल्होत्रा ने कहा कि एआई इस दशक को उसी तरह परिभाषित करेगा, जैसे 2000 के दशक को डिजिटलाइजेशन और 1990 के दशक को उदारीकरण ने परिभाषित किया था। उन्होंने कहा, “ अब हमारे सामने एकमात्र सवाल यह है कि क्या आप एआई की यात्रा को आकार देंगे या फिर डिफॉल्ट रूप से उसे आपको आकार देने का मौका देंगे।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई का इस्तेमाल इस तरह हो कि वह मानव निर्णय क्षमता का स्थान लेने की बजाय उसे मजबूत करे। उन्होंने बैंकों से तकनीकी बुनियादी ढांचे, प्रतिभा, कौशल विकास और पुनःकौशल प्रशिक्षण, टिकाऊ साझेदारियों तथा उपयुक्त गवर्नेंस ढांचे में निवेश करने का भी आग्रह किया, ताकि एआई को तेजी से अपनाया जा सके।श्री मल्होत्रा ने कहा कि एआई बुद्धिमत्ता को कई गुना बढ़ाता है, जिसका सीधा असर इस बात पर पड़ता है कि ऋण की कीमत कैसे तय की जाती है और उसे कैसे उपलब्ध कराया जाता है।

उन्होंने कहा कि कैश फ्लो, टैक्स रिटर्न, यूटिलिटी भुगतान और डिजिटल प्लेटफॉर्म के रिकॉर्ड जैसे वैकल्पिक डेटा पर प्रशिक्षित मॉडल बैंकिंग सेवाओं के दायरे को पारंपरिक ऋण मूल्यांकन से कहीं आगे ले जा सकते हैं। पारंपरिक अंडरराइटिंग ऐसी वित्तीय हिस्ट्री पर निर्भर करती है, जो आबादी के बड़े हिस्से के लिए बहुत सीमित है या उपलब्ध ही नहीं है।उन्होंने कहा कि एआई में वित्तीय निर्णय क्षमता के लिए वही करने की क्षमता है, जो यूपीआई ने वित्तीय लेनदेन के लिए किया। यानी इसे तत्काल, सूक्ष्म स्तर पर और अंतिम छोर तक उपलब्ध बनाना।भारतीय बैंकों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को केवल तकनीक खरीदने की प्रक्रिया के बजाय बोर्ड स्तर पर संचालित रणनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में अपनाने का आग्रह करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि जो संस्थान इस बदलाव में देरी करेंगे, उनके लिए यह परिवर्तन अपने आप तय हो जायेगा।आरबीआई गवर्नर ने एआई से जुड़े जोखिमों का भी उल्लेख किया। इसमें ऐतिहासिक ऋण डेटा से उत्पन्न पक्षपात और बहिष्करण का आगे बढ़ना, कुछ सीमित मॉडलों और विक्रेताओं पर निर्भरता से पैदा होने वाला जोखिम, तीसरे पक्ष पर निर्भरता, डेटा की गोपनीयता से जुड़े दायित्व, साइबर हमलों से जुड़ी कमजोरियां और मानवीय जवाबदेही की कमी शामिल है।

उन्होंने कहा, “ एआई में निष्पक्षता केवल अनुपालन की औपचारिकता नहीं है। यह डिजाइन की एक आवश्यक शर्त है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक के किसी निर्णय की अंतिम जिम्मेदारी बैंक की ही होनी चाहिये, न कि विक्रेता या एल्गोरिदम की।आईबीए के चेयरमैन और भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने कहा, “एआई की असली परीक्षा यह नहीं होगी कि हमारी तकनीक कितनी उन्नत हो जाती है, बल्कि यह होगी कि वह हमें क्या हासिल करने में सक्षम बनाती है, क्या यह किसी छोटे व्यवसाय को समय पर ऋण दिलाने, किसी किसान को जोखिम प्रबंधन में मदद करने, उत्पादकता बढ़ाने और हमारी वित्तीय प्रणाली को अधिक सुरक्षित एवं मजबूत बनाने में सहायता कर सकती है।”

फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि तकनीक निर्णय लेने में सहायता कर सकती है, लेकिन संस्थागत जिम्मेदारी सर्वोपरि रहनी चाहिये। उन्होंने कहा, “नयी कार्ययोजना को चार शब्दों में समेटा जा सकता है- साझेदारी, सावधानी, नवाचार और समावेशन।”

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