
नयी दिल्ली, 24 सितंबर। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने गुरुवार को अपने मानेसर परिसर में 300 किलोवाट का ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर संयंत्र शुरू करने की घोषणा की।कंपनी ने बताया कि यह संयंत्र पायलट परियोजना के तहत लगाया गया है और भविष्य में उसके दूसरे विनिर्माण परिसरों में भी इसके विस्तार की संभावना है। यहां बनने वाली ग्रीन हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर कंपनी के विनिर्माण कार्य में प्रोसेस फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।इस ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र से परिसर में बनने वाली सौर ऊर्जा का अधिक से अधिक इस्तेमाल सुनिश्चित होता है। छुट्टियों के दौरान बनने वाली सौर ऊर्जा, जो अन्यथा बेकार चली जाती, उसका इस्तेमाल ग्रीन हाइड्रोजन बनाने में किया जाता है। इस हाइड्रोजन को स्टोर किया जाता है और बाद में विनिर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस पायलट परियोजना से मिले अनुभव के आधार पर, कंपनी हरियाणा और गुजरात में अपने विनिर्माण संयंत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी को बड़े पैमाने पर अपनाने की योजना बना रही है।मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा, “जिस तरह हमने उत्पादन के लिए बहु-विकल्प की नीति अपनाई है, उसी तरह हमने विनिर्माण प्रक्रिया के लिए कई हरित ऊर्जा समाधानों की ओर कदम बढ़ाया है। हमारा 300 किलोवाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र शुरू करना केंद्र सरकार के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है।”कंपनी लगातार अपने संयंत्रों में हरित ऊर्जा का प्रयोग बढ़ा रही है। उसने वित्त वर्ष 2030-31 तक अपना कार्बन फुटप्रिंट घटाकर 2,66,000 टन करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान समय में यह 6,15,000 टन है।मारुति सुजुकी अपने खरखौदा संयंत्र में 10 टन प्रति दिन क्षमता वाला बायोगैस संयंत्र लगा रही है। इसके अगले साल मार्च तक चालू होने की उम्मीद है। हाल ही में उसने खरखौदा में एक मेगावाट आवर का बैटरी ऊर्जा भंडारण तंत्र भी चालू किया है।