राहुल गांधी के अहंकार, अनुशासनहीनता और बदतमीज़ी की भेंट चढ़ गया संसद का मानसून सत्र: भाजपा

राहुल गांधी के अहंकार, अनुशासनहीनता और बदतमीज़ी की भेंट चढ़ गया संसद का मानसून सत्र: भाजपा

नयी दिल्ली 13 अगस्त । भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को गैर-जिम्मेदार बताते हुए कहा है कि संसद का मानसून सत्र एक नेता के अहंकार, अनुशासनहीनता और बदतमीज़ी की भेंट चढ़ गया।भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए श्री गांधी को गैर-जिम्मेदार, अपरिपक्व, अनुशासनहीन और अहंकारी बताते हुए कहा कि उनमें राजनीतिक मर्यादा का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि श्री गांधी बिना किसी इजाज़त के अपनी बहन के साथ प्रधानमंत्री आवास के द्वार पर जा बैठे। वह कोई आम इंसान नहीं हैं। उनके पिता प्रधानमंत्री थे, उनकी दादी और परनाना भी प्रधानमंत्री थे। उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री आवास के लिए सुरक्षा के कितने कड़े इंतज़ाम होते हैं।

जब गृह सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह जी वहाँ गए, तो उन्होंने कहा कि वह बातचीत और चर्चा के लिए तैयार हैं।श्री प्रसाद ने कहा, ”जब उन्होंने (श्री सिंह) कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, तो श्री गांधी ने कहा कि उन्हें मंत्री का इस्तीफा चाहिए। श्री गांधी देश और संसद की राजनीति आपके अहंकार, विशेषाधिकार की भावना और इस सोच के दबाव में नहीं चलेगी कि आप अपनी मर्ज़ी से कुछ भी कर सकते हैं।”

भाजपा नेता ने कहा कि लोकतंत्र ऐसे काम नहीं करता और शायद यही आपकी पार्टी की मौजूदा हालत की वजह भी है। श्री गांधी अपनी गलतियों से सीखते नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने मांग की कि दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री जवाब दें। इस मांग पर उन्होंने सदन को चलने नहीं दिया।उन्होंने कहा कि कल गृह मंत्री अमित शाह ने मीडिया के सामने कहा कि मैं 24 घंटे तक पूरी बहस सुनने और उनके सभी तर्कों का बिंदु-वार जवाब देने के लिए तैयार हूँ।

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) और सदन में यह मामला उठाया और कहा, ” हम बहस के लिए तैयार हैं। सब कुछ ऐसे ही चल रहा था कि तभी उन्होंने (श्री गांधी) ने अपनी मांग बदल दी और कहा कि हमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा चाहिए। यह सिलसिला चलता रहा, और यही मुद्दा बनाया गया।”भाजपा नेता ने कहा कि इसके बाद श्री प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना इस्तीफ़ा दे दिया। जब चर्चा की बात आई, तो श्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने दो बड़े कदम उठाये। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पर एक बहुत कड़ा कानून लाया गया, फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की गयी और सज़ा तथा पेपर लीक गिरोह से निपटने के लिए भी कार्रवाई की गयी। इसके बाद, परीक्षा और नीट में सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई गयी।

उन्होंने कहा, “हमने साफ़ कर दिया है कि कोई गोली नहीं चलाई गयी। अगर उन्होंने संसद में श्री शाह की बात सुनी होती, तो उन्हें अपने सवालों के जवाब मिल जाते, लेकिन, उन्होंने सदन को चलने ही नहीं दिया। तब उनकी (श्री गांधी) दो मूर्खतापूर्ण टिप्पणियां सामने आयीं। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने (गृहमंत्री ने) गोली चलाने का आदेश दिया है, तो वो त्यागपत्र दें और अगर नहीं दिया है, तो वो अयोग्य मंत्री हैं, तब त्यागपत्र दें। उन्होंने कहा कि श्री गांधी को शासन की बुनियादी समझ भी नहीं है।”श्री प्रसाद ने कहा कि श्री शाह 24 घंटे सदन में बैठने को तैयार थे, फिर भी श्री गांधी ने कहा कि नहीं हमें उनका इस्तीफा चाहिए, उनकी बहस सुनकर क्या फायदा। श्री गांधी की उद्दंडता से देश की राजनीति नहीं चलेगी।

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