
नई दिल्ली, 28 सितंबर । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी तरह के आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने और आतंकवादी घटनाओं के लगातार विश्लेषण के आधार पर अगले 10 वर्षों के लिए मजबूत तथा ठोस ‘प्रहार’ तंत्र तैयार करने और उसे थाना स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया है।श्री शाह ने सोमवार को यहां ‘प्रहार- सीटी (आतंकवाद-रोधी) नीति और रणनीति’ पर आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने आतंकवाद से निपटने के लिए ‘प्रहार’ के हर स्तर पर स्वचालित प्रतिक्रिया प्रणाली को संस्थागत बनाने और सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की जरूरत बताई, ताकि कार्रवाई में किसी तरह की देरी न हो।
सम्मेलन में ‘प्रहार’ के सात स्तंभों रोकथाम, प्रतिक्रिया, आंतरिक क्षमताओं को एकजुट करना, मानवाधिकार, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली स्थितियों को कम करना, अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में तालमेल और समूचे समाज के साथ सामंजस्य पर चर्चा हुई।गृह मंत्री ने कहा कि ‘प्रहार’ के प्रत्येक स्तंभ के प्रति परिणाम आधारित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने इन पहलों के हर बिंदु पर सक्रियता के साथ काम करने पर जोर दिया।
श्री शाह ने कहा कि सरकार वर्ष 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को वापस लाई है। उन्होंने कहा कि एजेंसियों के बेहतर समन्वय से सीमापार हथियारों, विस्फोटकों और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल शहजाद भट्टी नेटवर्क के 40 से अधिक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया। इस मामले में 15 राज्यों में 100 से अधिक प्राथमिकी दर्ज कर 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सरकार ने गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी घोषित किया है।इस अवसर पर गृह मंत्री ने नया ‘प्रत्यर्पण पोर्टल’ भी शुरू किया। इससे विदेशों में बैठे भगोड़ों को वापस लाने के प्रयासों में समन्वय बेहतर करने और प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिलेगी। उन्होंने राज्य पुलिस बलों से विदेशों में बैठे इन भगोड़ों को वापस लाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने वाली विशेष टीम बनाने को कहा।
सम्मेलन में केंद्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख, 15 राज्यों के पुलिस महानिदेशक और सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के आतंकवाद-रोधी दस्तों के प्रमुख शामिल हुए। अन्य राज्यों के पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भाग लिया।