
नयी दिल्ली, 14 अगस्त । उच्चतम न्यायालय ने स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ विपक्ष के नेता राहुल गांधी की टिप्पणी पर शुक्रवार को समन और आपराधिक शिकायत रद्द कर दीं।शिकायतकर्ता ने श्री गांधी पर आरोप लगाया था कि श्री सावरकर पर उनकी टिप्पणियों का उद्देश्य समाज में नफरत भड़काना था।
उच्चतम न्यायालय ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान 17 नवंबर, 2022 को श्री सावरकर के खिलाफ टिप्पणी को लेकर श्री गांधी के खिलाफ लखनऊ मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी आपराधिक शिकायत और 12 दिसंबर, 2024 के समन को यह ध्यान में रखते हुए रद्द कर दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एक निर्वाचित सांसद के रूप में उन पर मुकदमा चलाने के लिए किसी पूर्व मंजूरी का खुलासा नहीं किया था।न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने समन के साथ-साथ आपराधिक शिकायत को रद्द करते हुए कहा, “हमने पक्षों के विद्वान वकीलों को सुना है। प्रतिवादी यूपी राज्य द्वारा दायर हलफनामे में मंजूरी दिये जाने का कोई खुलासा नहीं है। ऐसे मामले को देखते हुए, मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश रद्द किये जाते हैं।”
श्री गांधी द्वारा श्री सावरकर को औपनिवेशिक शासकों से पेंशन प्राप्त करने वाला एक ब्रिटिश सहयोगी बताने वाली टिप्पणी पर लखनऊ मजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष आपराधिक शिकायत दर्ज की गयी थी।श्री गांधी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था,जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने यह देखते हुए श्री गांधी की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था कि सीधे उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार का उपयोग करने के बजाय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 397 के तहत सत्र न्यायाधीश के पास जाने का उपाय उनके पास उपलब्ध था।उच्चतम न्यायालय ने 25 अप्रैल, 2025 को श्री गांधी को जारी समन पर रोक लगा दी थी। उन्हें राहत देते हुए न्यायालय ने श्री सावरकर के खिलाफ उनकी टिप्पणी को लेकर उन्हें फटकार भी लगायी थी और स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में ऐसी टिप्पणी करने के खिलाफ चेतावनी दी थी।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा था, “कानून पर आपके पास एक अच्छा बिंदु है और आपको स्टे मिलेगी। लेकिन उनके द्वारा किसी भी आगे के बयान को स्वतः संज्ञान में लिया जायेगा। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों पर कोई शब्द नहीं। उन्होंने हमें आजादी दी और हम उनके साथ ऐसा व्यवहार करते हैं?”श्री गांधी की टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए पीठ ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा श्री सावरकर की प्रशंसा में पत्र लिखे जाने का जिक्र किया था।
पीठ ने श्री गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से कहा था, “क्या वे जानते हैं कि महात्मा गांधी ने भी ‘आपका वफादार सेवक’ शब्दों का इस्तेमाल किया था? क्या वे जानते हैं कि उनकी दादी ने भी स्वतंत्रता सेनानी को उनकी प्रशंसा में एक पत्र भेजा था? उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में गैर-जिम्मेदाराना बयान न देने दें। स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास या भूगोल को जाने बिना आप ऐसे बयान नहीं दे सकते।”न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा था कि राहुल गांधी एक बड़े व्यक्ति हैं। वह एक राजनीतिक दल के नेता हैं। वह इस तरह परेशानी क्यों पैदा करते हैं? वह अकोला जाते हैं और महाराष्ट्र में ऐसा बयान देते हैं, जहां उनकी (सावरकर की) पूजा की जाती है? ऐसा मत कीजिए। आप यह बयान क्यों देते हैं?
न्यायमूर्ति दत्ता ने ब्रिटिश शासन के दौरान कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा मुख्य न्यायाधीश को संबोधित करने के तरीके का भी उल्लेख किया था और कहा था, “कोई इस तरह से सेवक नहीं बन जाता। अगली बार, कोई कहेगा कि महात्मा गांधी अंग्रेजों के सेवक थे। आप इस प्रकार के बयानों को बढ़ावा दे रहे हैं।”लखनऊ मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे द्वारा दायर एक शिकायत पर 12 दिसंबर, 2024 को श्री गांधी को समन जारी किया था।
श्री गांधी को भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए (शत्रुता को बढ़ावा देना) और 505 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत आरोपों का सामना करना पड़ा था।श्री पांडे की शिकायत भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के साथ श्री सावरकर के संबंधों से जुड़ी गांधी की 17 नवंबर, 2022 की टिप्पणियों से उत्पन्न हुई थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इन टिप्पणियों का उद्देश्य समाज में नफरत भड़काना था।