
लखनऊ, 17 अगस्त । उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और शारदा व घाघरा समेत प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच योगी सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रदेश के 12 जिलों के 166 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, जहां लगभग 64,402 लोग प्रभावित बताए गए हैं।राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की कुल 86 टीमें तैनात की गई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक लखीमपुर खीरी के पलियाकलां में शारदा नदी तथा बाराबंकी के एल्गिनब्रिज के निकट घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए 1,586 बाढ़ चौकियां और 1,263 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 40 शरणालय वर्तमान में संचालित हैं।राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ की 18, एसडीआरएफ की 16 तथा पीएसी की 52 टीमें विभिन्न जिलों में तैनात की गई हैं। प्रयागराज में एनडीआरएफ की तीन टीमें लगाई गई हैं, जबकि अयोध्या, बहराइच, बाराबंकी, बलिया, गोंडा, गोरखपुर, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, वाराणसी और लखनऊ समेत कई जिलों में अतिरिक्त बचाव दल सक्रिय हैं।
प्रशासन ने राहत सामग्री वितरण के लिए 308 केंद्र स्थापित किए हैं। अब तक 15,133 खाद्यान्न पैकेट, 24,266 लंच पैकेट, 22,720 ओआरएस पैकेट तथा 40,860 क्लोरीन टैबलेट वितरित की जा चुकी हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 69 मेडिकल टीमें और 51 एंबुलेंस भी तैनात हैं।राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 5,849 नावें तथा 1,101 मोटरबोट उपलब्ध कराई गई हैं। पशुधन की सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं। अब तक 3,502 प्रभावित पशुओं के लिए 154 क्विंटल भूसे का वितरण किया गया है।
प्रदेश में एक जून से 16 अगस्त तक 381 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 488.9 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। इस प्रकार प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 22 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। पिछले 24 घंटों में लखीमपुर खीरी में सर्वाधिक 92.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा बहराइच में 62.5 मिमी, शाहजहांपुर में 45.1 मिमी, संभल में 41.8 मिमी, चित्रकूट में 41.5 मिमी तथा लखनऊ में 40.9 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ से अब तक 69 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि किसी प्रकार की जनहानि अथवा पशुहानि की सूचना नहीं है। प्रशासन का कहना है कि नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों को और तेज किया जाएगा।