
मथुरा, 18 अगस्त। उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को लेकर चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया मंगलवार को मुस्लिम पक्ष के उपस्थित नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी।उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार यादव (द्वितीय) की विशेष लोक अदालत में समझौता वार्ता का तीसरा प्रयास किया गया था। मुस्लिम पक्ष के गैरहाजिर रहने के कारण अदालत ने समझौता वार्ता की पत्रावली निस्तारित कर दी।
मध्यस्थता प्रक्रिया विफल होने के बाद हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि मामले को लंबा खींचने का प्रयास किया जा रहा है।हिंदू पक्षकार एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विवादित करीब ढाई एकड़ भूमि को हिंदू पक्ष भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मानता है। उन्होंने कहा कि जन्मभूमि की भूमि के बदले किसी अन्य स्थान पर जमीन स्वीकार करने का सवाल ही नहीं है। उनके अनुसार अतिक्रमण की गई भूमि के बदले दूसरी जमीन देना समस्या का समाधान नहीं है।
उन्होंने शाही ईदगाह मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने से संबंधित प्रस्तावों को भी अस्वीकार किया। हिंदू पक्ष ने इस विवाद के संबंध में ऐतिहासिक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया और दावा किया कि वर्ष 1670 में औरंगजेब के शासनकाल में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को क्षति पहुंचाई गई तथा वहां ईदगाह का निर्माण किया गया।मध्यस्थता प्रक्रिया के निस्तारित होने के बाद अब मामले की आगे की कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट में होने की संभावना है। हिंदू पक्ष के अनुसार अगली सुनवाई अथवा समझौता वार्ता के लिए 21, 22 या 23 अगस्त की तिथियां प्रस्तावित हैं। मंगलवार को अदालत परिसर में महेंद्र प्रताप सिंह के अलावा दिनेश शर्मा, अजय प्रताप सिंह, दिनेश फलाहारी, महेश खंडेलवाल समेत कई हिंदू पक्षकार और अधिवक्ता मौजूद रहे।