रामपुर में आजम खान से जुड़े ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, 12 घंटे से जांच जारी

रामपुर में आजम खान से जुड़े ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, 12 घंटे से जांच जारी

रामपुर, 19 अगस्त । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेल में बंद पूर्व कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े ठिकानों पर बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे छापेमारी शुरू की। मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े धनशोधन मामले में रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली के 10 ठिकानों पर ईडी की तलाशी करीब 12 घंटे बाद भी जारी रही।ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत यह कार्रवाई की है। एजेंसी की टीमें रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय और ट्रस्ट से जुड़े परिसरों के अलावा ठेकेदार पवन जैन तथा आजम खान के चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) समेत अन्य संबंधित लोगों के ठिकानों पर भी जांच कर रही हैं।

ईडी के अनुसार जांच का मुख्य केंद्र सरकारी ठेकों से जुड़े धन के डायवर्जन और उसके बाद उस धन के ट्रस्ट तथा विश्वविद्यालय की गतिविधियों में इस्तेमाल से जुड़ा है। एजेंसी को जांच के दौरान ऐसे वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिली है, जिनमें सरकारी ठेकों से लाभ पाने वाले कुछ निजी ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच धन का लेनदेन होने का संदेह है।एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी ठेकों से डायवर्ट की गई रकम का इस्तेमाल ट्रस्ट को दान देने, विश्वविद्यालय में निर्माण कार्य कराने अथवा अन्य गतिविधियों में किया गया या नहीं। तलाशी के दौरान वित्तीय दस्तावेज, लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं।

ईडी यह भी जांच कर रही है कि सरकारी परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदारों को भुगतान किए जाने के बाद धन का प्रवाह किन माध्यमों से हुआ और क्या उसका कोई हिस्सा जौहर ट्रस्ट अथवा विश्वविद्यालय तक पहुंचा। जांच एजेंसी के मुताबिक कुछ ठेकेदारों द्वारा ट्रस्ट को कथित तौर पर पर्याप्त राशि दान के रूप में दिए जाने तथा विश्वविद्यालय में निर्माण कार्य कराए जाने की जानकारी भी जांच के दायरे में है।मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की है और यही ट्रस्ट रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन करता है। आजम खान विश्वविद्यालय के संस्थापक और कुलाधिपति हैं।

वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय के लिए जमीन के कथित अधिग्रहण और कब्जे को लेकर आजम खान के खिलाफ कई मामले दर्ज हुए थे। हालांकि मौजूदा ईडी जांच का फोकस जमीन विवादों से आगे बढ़कर सरकारी ठेकों से जुड़े धन के डायवर्जन और उसके बाद उसके इस्तेमाल से जुड़ी धनशोधन की कड़ी स्थापित करने पर है।ईडी की कार्रवाई के दौरान समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं उपाध्यक्ष सुमैया राणा जौहर विश्वविद्यालय पहुंचीं। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान उन्होंने ईडी की कार्रवाई को बेहद शर्मनाक बताते हुए आरोप लगाया कि आजम खान और विश्वविद्यालय पर दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

सुमैया राणा ने कहा कि इससे पहले भी छात्रों ने विश्वविद्यालय को बचाने के लिए संघर्ष किया था। अब ईडी के माध्यम से दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान और विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के छात्रों पर ईडी और पुलिस द्वारा अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।सपा के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी और नगर अध्यक्ष रहे आसिम राजा ने भी ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ईडी ने पूरे विश्वविद्यालय परिसर को घेर रखा है और किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर दबाव बनाया जा रहा है और कार्रवाई का उद्देश्य विश्वविद्यालय में भय का माहौल पैदा करना है। आसिम राजा ने कहा कि यदि जांच करनी है तो एजेंसी को जांच करनी चाहिए, लेकिन किसी को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब 10 वर्षों से आजम खान और विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों की जांच चल रही है।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष एवं सपा नेता सतनाम सिंह मट्टू की ईडी टीम से भी बहस हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद कुछ लोग खुद को ईडी का अधिकारी बता रहे हैं, लेकिन अपना परिचय नहीं दे रहे हैं।मट्टू ने दावा किया कि विश्वविद्यालय में प्रवेश करने वाले छात्रों के मोबाइल नंबर लिए जा रहे हैं और जिन छात्रों के पास मोबाइल नहीं हैं, उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने ईडी की कार्रवाई को गैरकानूनी बताया। उधर, ईडी की तलाशी और जांच देर शाम तक जारी रही। एजेंसी की ओर से बरामद दस्तावेजों या डिजिटल साक्ष्यों के संबंध में तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। तलाशी के बाद इन साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

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