
लखनऊ, 21 अगस्त। उत्तर प्रदेश में रक्त और उसके अवयवों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा बिना जरूरत रक्त ट्रांसफर और अनियमित आपूर्ति पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने रक्त केंद्रों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।विभाग की ओर से हाल में प्रदेश के करीब 200 रक्त केंद्रों का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने और मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने के लिए औषधि नियमावली, 1945 तथा नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एनबीटीसी) के मानकों के अनुरूप ये निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देशों के अनुसार किसी मरीज को रक्त अथवा रक्त अवयव उपलब्ध कराने से पहले उसकी वास्तविक आवश्यकता सुनिश्चित करनी होगी और ट्रांसफ्यूजन का औचित्य अभिलेखों में दर्ज करना होगा। प्रदेश के बाहर स्थित रक्त केंद्रों से पीआरबीसी ट्रांसफर के दौरान मूल रक्त की कम से कम 30 सेंटीमीटर (तीन सेगमेंट) पायलट ट्यूब और सीरम प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
बाहरी रक्त केंद्र से प्राप्त यूनिट की गुणवत्ता जांच के लिए उसे स्थानीय औषधि निरीक्षक की मौजूदगी में किसी राजकीय रक्त केंद्र भेजना होगा और जांच रिपोर्ट को सुरक्षित रखना होगा। प्रत्येक रक्त यूनिट के साथ टीटीआई (ट्रांसफ्यूजन ट्रांसमिसिबल इन्फेक्शन) जांच रिपोर्ट तथा डोनर फॉर्म की छायाप्रति संलग्न करनी होगी। डोनर की ओर से रक्त केंद्र से बाहर रक्त के उपयोग की सहमति भी दर्ज करनी होगी। रक्त की मांग और उपलब्धता में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य किया गया है।रक्त एवं रक्त अवयवों का परिवहन निर्धारित तापमान और शर्तों के अनुसार करना होगा। पूरी प्रक्रिया के दौरान तापमान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। रक्त प्राप्त करने वाले केंद्र में यूनिटों के उचित भंडारण के लिए पर्याप्त क्षमता वाले ब्लड स्टोरेज कैबिनेट उपलब्ध होने चाहिए और निरीक्षण के दौरान थर्मोग्राफ प्रस्तुत करना होगा। ट्रांसफर से प्राप्त रक्त अथवा अवयवों, उनकी जांच रिपोर्ट की प्रतियों और संबंधित विवरण को रजिस्टर में दर्ज करना होगा। इसके साथ इश्यू करने वाले चिकित्सक का पर्चा भी रिकॉर्ड में सुरक्षित रखना होगा।
दिशा-निर्देशों में डोनर-टू-पेशेंट ट्रेसबिलिटी पर विशेष जोर दिया गया है। किसी गुणवत्ता संबंधी कमी अथवा प्रतिकूल स्थिति की जानकारी मिलने पर रक्त उपलब्ध कराने और प्राप्त करने वाले दोनों केंद्रों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। ट्रांसफर से प्राप्त रक्त यूनिटों को केवल किसी एक संस्था के मरीजों के लिए सुरक्षित रखने के बजाय आवश्यकता वाले सभी मरीजों को समान रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।ट्रस्ट द्वारा नए रक्त केंद्र का लाइसेंस लेने या नवीनीकरण कराने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि केंद्र पर किसी व्यक्ति विशेष अथवा एक ही परिवार का नियंत्रण न हो। ट्रस्ट का सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं जनकल्याण के क्षेत्र में कार्यरत होना तथा मूल ट्रस्ट के रूप में कम से कम दो वर्ष से संचालित होना आवश्यक होगा।
ट्रस्ट के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन में स्वास्थ्य एवं रक्तदान से संबंधित स्पष्ट उद्देश्य दर्ज होना चाहिए। आवेदन के साथ ट्रस्ट का पैन कार्ड, आयकर पंजीकरण प्रमाणपत्र तथा सदस्यों के नाम, पते, मोबाइल नंबर, ई-मेल, आधार और पैन कार्ड की प्रतियां उपलब्ध करानी होंगी।ट्रस्ट द्वारा संचालित सभी रक्त केंद्रों के नाम, पते, लाइसेंस संख्या, जारी होने की तारीख, वैधता अवधि तथा लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण से संबंधित कार्रवाई का विवरण भी आवेदन में देना होगा। रक्त केंद्र में नियुक्त तकनीशियन या तकनीकी पर्यवेक्षक की शैक्षिक योग्यता डीएमएलटी होने पर उसका प्रमाणपत्र यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी से सत्यापित होना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में तकनीकी स्टाफ की अनुपस्थिति में रक्त केंद्र का संचालन नहीं किया जा सकेगा। ऐसा पाए जाने पर लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है।
आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर रक्त के सभी नमूनों में संक्रामक रोगों की जांच 100 प्रतिशत एलिसा अथवा केमिल्यूमिनेसेंस तकनीक से सुनिश्चित करनी होगी। ब्लड डोनर का आधार कार्ड और आधार से लिंक मोबाइल नंबर डोनर रजिस्टर में दर्ज करना होगा। इसी प्रकार रक्त प्राप्त करने वाले मरीज अथवा उसके तीमारदार का आधार कार्ड और लिंक मोबाइल नंबर इश्यू रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।मरीज के रक्त के नमूने को कम से कम सात दिन तक सुरक्षित रखना होगा। पायलट ट्यूब को भी निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर रक्त की पहचान और जांच को दोबारा सत्यापित किया जा सके। रक्त और रक्त अवयवों के लिए अलग-अलग निर्धारित तापमान पर उचित भंडारण व्यवस्था करनी होगी। सभी स्टोरेज कैबिनेट के थर्मोग्राफ रिकॉर्ड निरीक्षण के लिए सुरक्षित रखने होंगे।
रक्त केंद्रों में स्वच्छता मानकों का पालन करना तथा सभी आवश्यक उपकरणों का वर्ष में कम से कम एक बार अनिवार्य कैलिब्रेशन कराना होगा। स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) द्वारा निर्धारित शुल्क सूची को केंद्र के प्रमुख और आसानी से दिखाई देने वाले स्थान पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।डोनर रजिस्टर, मास्टर रजिस्टर, इश्यू रजिस्टर, ब्लड बैग और स्टॉक रजिस्टर सहित सभी अनिवार्य अभिलेखों को नियमित रूप से अपडेट रखना होगा। इसका उद्देश्य डोनर से लेकर मरीज तक प्रत्येक रक्त यूनिट की पूरी ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करना है। रजिस्टरों में आवश्यक प्रविष्टियां अद्यतन नहीं मिलने पर लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा तकनीकी स्टाफ को उनके पद और जिम्मेदारी के अनुरूप प्रशिक्षण देना भी अनिवार्य किया गया है।
विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों और रक्त केंद्र संचालकों को नए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इससे रक्त की गुणवत्ता, उपलब्धता, भंडारण और वितरण में पारदर्शिता बढ़ने के साथ मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करने की उम्मीद है।