हत्या के मामले में दोषी 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल की सुप्रीम रिहाई

नयी दिल्ली, 21 अगस्त । उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाये 105 साल के रसिक चंद्र मंडल को रिहा कर दिया।मंडल को 1988 के हत्या के एक मामले में 1994 में दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सज़ा सुनायी गयी थी। न्यायालय ने 29 नवंबर, 2024 के उस आदेश को सही ठहराया, जिसके तहत उन्हें अंतरिम ज़मानत/पैरोल दी गयी थी और उनकी बची हुई सज़ा (अगर कोई हो) को माफ़ कर दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मंडल की ज़्यादा उम्र को देखते हुए कहा कि वे इस मामले को बंद कर रहे हैं और उन्हें दोबारा हिरासत में नहीं लिया जायेगा।न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “भले ही उम्रकैद की सज़ा पूरी न हुई हो, उन्हें दोबारा हिरासत में नहीं लिया जायेगा।” इसके साथ ही उन्होंने मंडल को ज़मानत देने वाले 29 नवंबर, 2024 के आदेश को पक्का और अंतिम बना दिया।

वर्ष 1920 में पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले में जन्मे मंडल को 1994 में दोषी ठहराया गया था और वे 29 नवंबर, 2024 तक जेल में रहे। उस दिन शीर्ष अदालत की एक पीठ ने उन्हें अंतरिम ज़मानत/पैरोल दी थी। तब तक वे 30 साल से ज़्यादा समय हिरासत में बिता चुके थे। उस पीठ में तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार शामिल थे।शीर्ष अदालत ने अपने 29 नवंबर, 2024 के आदेश में कहा, “अंतरिम आदेश के तौर पर, हम निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता रसिक चंद्र मंडल को मौजूदा रिट याचिका के लंबित रहने के दौरान अंतरिम ज़मानत/पैरोल पर रिहा किया जायेगा। इसके लिए शर्तें निचली अदालत तय करेगा।”

गत नौ जुलाई, 2026 को मंडल की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह पूरी तरह से अक्षम हो गये हैं। इसके बाद न्यायमूर्ति नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से कहा कि वे मंडल की सज़ा कम करने और समय से पहले रिहाई की अर्ज़ी पर निर्देश लें।उच्चतम न्यायालय ने तीन मई, 2021 को मंडल की अर्ज़ी पर नोटिस जारी किया था। उस पीठ में न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना शामिल थे। न्यायमूर्ति खन्ना बाद में मुख्य न्यायाधीश बने और अब रिटायर हो चुके हैं।

वर्ष 2018 में, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हत्या के मामले में मंडल की सज़ा के ख़िलाफ़ उनकी अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन न्यायालय ने उनकी अर्ज़ी भी खारिज कर दी।बारह अक्टूबर, 2020 को, मंडल ने (जो उस समय 99 साल के थे) अपनी ज़्यादा उम्र और उम्र से जुड़ी बीमारियों का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Designed and Developed by Prakhar Dixit