जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चिंता नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता : विजेन्द्र

जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चिंता नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता : विजेन्द्र

नयी दिल्ली, 22 अगस्त। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने विश्वविद्यालयों से सार्वजनिक नीति और सतत जीवनशैली के मॉडल तैयार करने में सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया है।श्री गुप्ता ने शनिवार को फरीदाबाद स्थित मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज में वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक संकल्प है। दो दिवसीय कॉन्क्लेव की थीम “ग्रीन कैंपस : सतत और लचीले भविष्य के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को सशक्त बनाना” है। उन्होंने कहा कि अच्छे कानूनों के लिए अच्छे तथ्य, विश्वसनीय शोध और जमीनी प्रमाण जरूरी हैं। विश्वविद्यालयों को शोध आधारित सुझावों और विशेषज्ञ राय के माध्यम से विधायिकाओं तथा सरकारों तक यह ज्ञान पहुंचाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चिंता नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती गर्मी, सर्दियों में स्मॉग, प्रदूषित हवा, अचानक आने वाली बाढ़ और भूजल स्तर में गिरावट जैसी चुनौतियां जनस्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि केवल कानून और नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सतत विकास को लोगों की आदत और जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने सवाल किया कि यदि देश के विश्वविद्यालय ग्रीन नहीं होंगे तो भारत का भविष्य ग्रीन कैसे होगा।विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालयों के परिसर छोटे शहरों की तरह होते हैं, जहां बिजली, पानी, परिवहन, भोजन, भवन और कचरे से जुड़ी व्यवस्थाएं होती हैं। ऐसे में संस्थान सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, कचरा पृथक्करण, 100 प्रतिशत कचरा प्रबंधन और हरित बुनियादी ढांचे को अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सफल ग्रीन कैंपस मॉडल को बाद में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा सकता है।

श्री गुप्ता ने अनुप्रयुक्त शोध पर जोर देते हुए कहा कि शोध को प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे खेत, मोहल्ले और नगर निकायों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने किफायती सौर तकनीक, जल-कुशल कृषि, पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री और वायु गुणवत्ता की निगरानी जैसे क्षेत्रों में भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान विकसित करने की जरूरत बतायी।उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा भी सौर ऊर्जा के अधिक उपयोग, डिजिटल कार्यप्रणाली के जरिए कागज की खपत कम करने और ऐतिहासिक ओल्ड सेक्रेटेरिएट परिसर के पर्यावरणीय प्रदर्शन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Designed and Developed by Prakhar Dixit