
नयी दिल्ली, 22 अगस्त। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बीते वर्ष दलहन का रकबा और पैदावार में हुई वृद्धि एक अच्छा संकेत है लेकिन केवल पैदावार बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार की पूरी वैल्यू चेन को एक साथ मजबूत करना होगा ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
श्री चौहान यहां शनिवार को पूसा में आयोजित डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति और आगामी रणनीति पर समीक्षा सम्मेलन में लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री की प्राथमिकता के अनुरूप अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, दालों की पैदावार में देश को आत्मनिर्भर बनाना और कृषि सेवाओं को डिजिटल व पारदर्शी बनाकर उनका वास्तविक लाभ सीधे खेतों और किसानों तक पहुंचाना है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है जब योजनाओं का प्रभाव केवल कागजी रिपोर्टों में नहीं, बल्कि खेतों में और किसानों की जेब में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। उन्होंने राज्यों से पूरी जिम्मेदारी और समयबद्ध तरीके से काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि जहां गंभीरता और कौशल से प्रयास हुए हैं, वहां शत-प्रतिशत से अधिक लक्ष्य हासिल किए गए हैं।
उन्होंने किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) के महत्व की चर्चा करते हुए बताया कि इसके माध्यम से भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंच रहा है, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शिविर लगाकर एक महीने के भीतर तकनीकी रूप से फार्मर आईडी बनाना संभव है।
डिजिटल मैपिंग और सर्वे पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नक्शों का जियो-रेफरेंसिंग और डेटा सत्यापन इस मिशन की रीढ़ है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तकनीकी कारणों से डेटा में आने वाली विसंगतियों का मैदान पर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए ताकि डिजिटल रिकॉर्ड वास्तविक भूमि स्थिति से मेल खाएं।
गौरतलब है कि डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन (एग्रीस्टैक) में देश में अब तक 26 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करते हुए 10.41 करोड़ फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं, जो पीएम-किसान कवरेज का 84.68 प्रतिशत है। इसके अलावा 5.9 लाख गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी की जा चुकी है, जो चिन्हित गांवों का 93.05 प्रतिशत है। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे का दायरा 2024-25 के 290 जिलों (3.87 करोड़ हेक्टेयर) से बढ़ाकर 2025-26 में 650 जिलों (9.18 करोड़ हेक्टेयर) तक पहुंचाया गया है।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन ने भी कई उपलब्धियां हासिल की हैं। देश में दलहन पैदावार वर्ष 2024-25 के 256.83 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 274.09 लाख टन हो गई है। घरेलू उत्पादन में वृद्धि के परिणामस्वरूप दालों की आयात निर्भरता 2024-25 के 72.56 लाख टन से घटकर 2025-26 में 59.64 लाख टन पर आ गई है।
केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इन मिशनों को पूर्ण जवाबदेही के साथ सफल बनाएंगी, जिससे देश की खाद्य-आत्मनिर्भरता और मजबूत होगी।
इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, असम के मंत्री पियूष हजारिका, अरुणाचल प्रदेश के मंत्री ग्रेबियल डेन्वॉंग बागसू, नागालैंड के मंत्री महात यंथन और केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चन्द्रा सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।