देर रात में खाना खाने की आदत डाल सकती है स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर

देर रात में खाना खाने की आदत डाल सकती है स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर

जालौन, 26 अगस्त । व्यस्त दिनचर्या के बीच देर रात भोजन करने अथवा भूख लगने पर स्नैक्स और मीठा खाने की आदत स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।राजकीय मेडिकल कॉलेज, उरई के प्रधानाचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बुधवार को यूनीवार्ता को बताया कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि व्यक्ति क्या खाता है, बल्कि भोजन कब और कितनी मात्रा में लिया जा रहा है, यह भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में दिनचर्या में बदलाव के कारण देर रात भोजन और स्नैकिंग बढ़ी है, जिसका असर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि शरीर 24 घंटे की जैविक घड़ी के अनुसार काम करता है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह नींद और जागने के अलावा भूख, हार्मोन, ग्लूकोज, मेटाबॉलिज्म, इंसुलिन तथा ऊर्जा से जुड़ी कई शारीरिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है।डॉ. त्रिवेदी के अनुसार दिन के समय शरीर भोजन और ग्लूकोज को संभालने के लिए अपेक्षाकृत अधिक तैयार रहता है, जबकि रात में इंसुलिन संवेदनशीलता और मेटाबोलिक रिस्पांस में बदलाव आता है। ऐसे में सोने के बिल्कुल करीब भोजन करने से शरीर को भोजन पचाने और ग्लूकोज को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।

विशेष रूप से देर रात अधिक कैलोरी या अधिक वसा वाला भोजन ग्लूकोज और इंसुलिन प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है। भोजन करने के तुरंत बाद सो जाने से एसिड रिफ्लक्स, पेट में भारीपन, ब्लोटिंग और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।लंबे अंतराल के बाद भोजन करने पर व्यक्ति सामान्य से अधिक मात्रा में खाना खा सकता है। इससे कुल कैलोरी सेवन बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए रात के भोजन में केवल खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि भोजन का समय, पोर्शन साइज और सोने का समय भी महत्वपूर्ण है।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि दिनभर की भागदौड़ के बाद देर रात मीठा, नमकीन या कुरकुरे खाद्य पदार्थ खाने की आदत को मामूली नहीं समझना चाहिए। देर रात जागना, लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम, तनाव और अनियमित भोजन लंबे समय में जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं।उन्होंने बताया कि तनाव और भूख के बीच हार्मोनल संबंध भी होता है। लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर प्रभावित हो सकता है। इससे मीठे और अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों की इच्छा बढ़ सकती है तथा भोजन के बाद मिलने वाले तृप्ति संकेत प्रभावित हो सकते हैं। भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन में बदलाव भी अधिक खाने की प्रवृत्ति से जुड़ सकता है।

अनियमित खानपान और लगातार देर रात भोजन करने की आदत से अधिक वजन और पेट के आसपास चर्बी बढ़ने का जोखिम बढ़ सकता है। यह इंसुलिन प्रतिरोध और अन्य कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम कारकों से भी जुड़ सकता है।हालांकि, डॉ. त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि केवल देर रात खाना ही मोटापे या मधुमेह का एकमात्र कारण नहीं है। कुल कैलोरी सेवन, भोजन की गुणवत्ता, नींद, तनाव, आनुवंशिक कारक और संपूर्ण जीवनशैली भी स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। इसलिए संतुलित भोजन के साथ नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद पर ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि भोजन को लेकर समय और मात्रा दोनों के प्रति सजग रहें। नियमित और पौष्टिक भोजन लें, अनावश्यक देर रात स्नैकिंग से बचें तथा भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखने की आदत विकसित करें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर जीवनशैली से जुड़ी कई समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।

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