‘पितृसत्ता को खत्म करो’ का राहुल गांधी का नारा कर्नाटक या हिमाचल प्रदेश जैसे कांग्रेस शासित राज्यों में क्यों नहीं लागू होता है: भाजपा

‘पितृसत्ता को खत्म करो’ का राहुल गांधी का नारा कर्नाटक या हिमाचल प्रदेश जैसे कांग्रेस शासित राज्यों में क्यों नहीं लागू होता है: भाजपा

नयी दिल्ली 26 अगस्त। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पर महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर देश के मतदाताओं और युवाओं को भ्रमित करने का आरोप लगाते पूछा है कि क्या ‘पितृसत्ता को खत्म करो’ का नारा सिर्फ पुणे के मंच तक ही सीमित था, अगर नहीं तो कर्नाटक या हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में इसका अमल क्यों नहीं करते हैं।भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 22 अगस्त को, विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी ने देश में एक नयी झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश की। उन्होंने महिलाओं से पितृसत्ता को खत्म करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “मैं श्री गांधी से पूछना चाहती हूं, क्या आप ‘पितृसत्ता को खत्म करो’ का नारा सिर्फ पुणे के मंच तक ही सीमित रखते हैं, जबकि आप अपनी पार्टी के भीतर राजनीतिक पितृसत्ता को बढ़ावा देते रहते हैं?” उन्होंने कहा कि श्री गांधी के पास न तो कोई विजन है और न ही कोई सकारात्मक एजेंडा। इसलिए, अब उनकी रिसर्च टीम कागज के टुकड़े पर जो कुछ भी लिखकर उन्हें देती है, वह उसी के जरिए देश के वोटरों और युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं।

सुश्री स्वराज ने कहा कि श्री गांधी सनसनी फैलाने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए बयान दे रहे हैं। ऐसा लगता है कि विपक्ष के नेता मीम्स और रील्स के लिए बयान दे रहे हैं।भाजपा सांसद ने कहा कि एक तरफ श्री गांधी ‘पितृसत्ता को खत्म करो’ का नारा देते हैं। वहीं उनकी पार्टी के नेता महिलाओं को अपमान करते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद कंगना रनौत को मंडी निर्वाचन क्षेत्र से जब टिकट दिया गया था, तो श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने “रेट” (कीमत) के बारे में पूछा और श्री गांधी ने उनके बयान पर आपत्ति नहीं जतायी थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अन्य नेता नेता रणदीप सुरजेवाला ने कैथल में एक रैली के दौरान श्रीमती हेमा मालिनी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था, जिसके लिए चुनाव आयोग ने उन पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया, लेकिन श्री गांधी ने उनके बयान को लेकर एक शब्द भी नहीं कहा था।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी को ‘राष्ट्रपत्नी’ कहकर अपमानित किया था, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने मौन साध लिया। 22 अगस्त को उन्होंने पुणे के मंच से यह बयान दिया, जबकि 10 दिन पहले खुद श्री गांधी श्री संदीप दीक्षित के साथ एक बेहद ओछे मजाक में शामिल हुए थे।सुश्री स्वराज ने सवाल किया कि कांग्रेस कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में सत्ता में है। श्री गांधी, अगर आप ‘पितृसत्ता को खत्म करना’ चाहते हैं, तो कर्नाटक या हिमाचल प्रदेश के मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री क्यों नहीं है? उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए कि महिलाओं का सशक्तिकरण उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक नारा है। अगर वह वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहते, तो वह नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध नहीं करते।

उन्होंने कहा कि यह चुनिंदा गुस्सा क्यों? आपने भारत में केवल एक समुदाय को ही क्यों निशाना बनाया है? जब धर्म की बात आती है तो “पितृसत्ता को खत्म करने” का नजरिया क्यों बदल जाता है? अगर आप सच में पितृसत्ता को खत्म करना चाहते थे, तो जब उच्चतम न्यायालय ने शाह बानो को गुज़ारा-भत्ता ( देने का फ़ैसला सुनाया, तब कांग्रेस सरकार ने उस फ़ैसले को पलटने के लिए कानून क्यों बनाया? आपने तीन तलाक़ कानून का विरोध क्यों किया?सुश्री स्वराज ने कहा, “मैं आपको चुनौती देती हूँ कि अगर आप सच में पितृसत्ता को खत्म करना चाहते हैं, तो पूरा ‘वंदे मातरम’ गाइये। संसद ने ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा देने वाला कानून पास किया है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति ने जिहादी सोच और क्रूरता के आगे झुकते हुए एक प्रस्ताव पास किया और उस गीत के स्तर को कम कर दिया। एक ऐसा गीत जो मातृभूमि को देवी के रूप में देखता है। आपको तुष्टीकरण की राजनीति के लिए कुछ भी ग़ैर-कानूनी करने में कोई परेशानी नहीं है।

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