
प्रयागराज, 28 अगस्त । उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने हाईस्कूल के अंकपत्रों और प्रमाण-पत्रों में जन्मतिथि संबंधी त्रुटियों को रोकने के लिए विद्यालयों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।बोर्ड के संज्ञान में आया है कि प्राथमिक कक्षाओं में निर्धारित न्यूनतम आयु से कम उम्र के बच्चों का प्रवेश ले लिया जाता है, जिसके चलते बाद में जन्मतिथि संशोधन के मामले सामने आते हैं।
बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों और मुख्यालय में जन्मतिथि संशोधन के लिए लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। कई मामलों में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने अथवा नियमानुसार प्रवेश नहीं दिए जाने के कारण दर्ज जन्मतिथि की प्रमाणिकता पर सवाल खड़े होते हैं।बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि हाईस्कूल का प्रमाण-पत्र भविष्य में विभिन्न सरकारी एवं आधिकारिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। ऐसे में छात्र-छात्राओं की जन्मतिथि शुरू से ही सही दर्ज किया जाना आवश्यक है। बोर्ड के अनुसार, निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत कक्षा एक में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष निर्धारित है। विद्यालयों को इसी प्रावधान के अनुरूप प्रवेश प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
बोर्ड ने कहा है कि यदि सामान्य जन्म प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं है तो प्रवेश के समय जन्मतिथि दर्ज करने के लिए चार निर्धारित अभिलेखों में से किसी एक को आधार बनाया जा सकता है। इनमें अस्पताल अथवा एएनएम का पंजीकरण अभिलेख, आंगनबाड़ी का अभिलेख, ग्राम पंचायत के जन्म एवं मृत्यु संबंधी पंजी रजिस्टर तथा माता-पिता या अभिभावक द्वारा बच्चे की आयु के संबंध में दिया गया शपथ-पत्र शामिल है।सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि छात्र-छात्राओं की जन्मतिथि केवल वैध और निर्धारित अभिलेखों के आधार पर ही दर्ज की जाए। इसका उद्देश्य भविष्य में हाईस्कूल परीक्षा के अंकपत्रों और प्रमाण-पत्रों में जन्मतिथि संबंधी किसी भी विसंगति को रोकना है। यूपी बोर्ड ने यह निर्देश सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा है।