
नयी दिल्ली, 30 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि स्वच्छता की सबसे बड़ी खूबी यहहै कि जब किसी स्थान को साफ रखने का संकल्प वहां के लोगों का अपना संकल्प बन जाता है, तो बदलाव केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उस जगह की पूरी पहचान बदल जाती है।
श्री मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में आज स्वच्छता के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे जनभागीदारी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जब किसी स्थान को साफ रखने का संकल्प वहां के लोगों का अपना संकल्प बन जाता है, तो बदलाव केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उस जगह की पूरी पहचान बदल जाती है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में स्वच्छता के लिए किये जा रहे ऐसे प्रयास लगातार प्रेरणा देते हैं।उन्होंने उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के पटवाई गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि आकाश और रोहन नाम के दो दोस्तों ने अपने आसपास के इलाके को गंदगी से भरा देखा तो उन्होंने खुद सफाई का बीड़ा उठाया। दोनों कचरे के बैग लेकर सफाई अभियान में जुट गये। धीरे-धीरे अन्य युवा भी उनके साथ जुड़ते गये और ‘क्लीन-अप पटवाई’ नाम से एक टीम बन गयी। श्री मोदी ने बताया कि इस टीम के युवा अब तक चार गंगा घाटों की सफाई कर चुके हैं और एक टन से अधिक प्लास्टिक कचरा हटा चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने कई तालाबों और सार्वजनिक स्थानों की भी सफाई की है।
श्री मोदी ने इस वर्ष श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान स्वच्छता और जनभागीदारी की मिसाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कठिन रास्तों पर हजारों स्वच्छता कर्मी दिन-रात सेवा में जुटे रहे। इस वर्ष यात्रा के दौरान 400 टन से अधिक कचरे को एकत्र कर उसका प्रसंस्करण किया गया। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस अभियान में श्रद्धालुओं ने भी सक्रिय भागीदारी की। सोलह हजार से अधिक यात्रियों ने स्वच्छता का संकल्प लिया, जबकि 10 हजार से अधिक यात्रियों को ‘रिस्पोंसिबल यात्री’ प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।प्रधानमंत्री ने अमरनाथ यात्रा में किये गये एक अनोखे प्रयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान घोड़ों और खच्चरों के गोबर से बायोगैस तैयार की गयी और इसी स्वच्छ ऊर्जा से ‘स्वच्छ ज्योत’ प्रज्ज्वलित की गयी। उन्होंने कहा कि इससे यह संदेश मिलता है कि बाबा बर्फानी की पवित्र यात्रा में स्वच्छता भी सेवा और आस्था का एक रूप बन गयी है।
उन्होंने कहा कि गांव हो या शहर, नदियां हों या तीर्थस्थल, इनकी पहचान लोगों के व्यवहार से भी बनती है। जब स्वच्छता हमारे व्यवहार का हिस्सा बन जाती है तो उस स्थान की शोभा और बढ़ जाती है।