
सहारनपुर, 1 सितंबर । उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 की तैयारियों के बीच पश्चिम में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव बुधवार को सहारनपुर पहुंचेंगे, जबकि राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी उनके एक दिन बाद तीन सितंबर को रामपुर मनिहारान में कार्यक्रम में शामिल होंगे। दोनों नेताओं के कार्यक्रमों को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल बढ़ गई है।अखिलेश यादव को छह सितंबर को सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रूद्रसेन के आमंत्रण पर एक रैली में शामिल होना था। इसी बीच रालोद के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद चंदन चौहान ने केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का तीन सितंबर को रामपुर मनिहारान के गोचर कृषि इंटर कॉलेज में कार्यक्रम तय करा दिया। इसके बाद सपा ने रैली का कार्यक्रम स्थगित कर दिया और अखिलेश यादव ने दो सितंबर को सहारनपुर आने का कार्यक्रम बनाया।
सपा विधायक के अनुसार अखिलेश यादव दो सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे गुर्जर नेता चौधरी यशपाल सिंह के पुत्र चौधरी रूद्रसेन और चौधरी इंद्रसेन के आवास पर पहुंचेंगे। वहां वह पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद करने के साथ संभावित उम्मीदवारों और संगठन की स्थिति को लेकर फीडबैक लेंगे।अखिलेश यादव के कार्यक्रम को लेकर सहारनपुर की मुस्लिम सियासत में भी हलचल है। पूर्व सांसद फजर्लुरहमान कुरैशी ने बताया कि अखिलेश यादव लखनऊ रवाना होने से पहले दोपहर दो से तीन बजे के बीच उनके आवास पर पहुंचेंगे और पार्टीजनों से मुलाकात करेंगे।
सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का भी प्रभाव माना जाता है और सपा के कुछ स्थानीय नेताओं के साथ उनके राजनीतिक मतभेद रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव के दौरे को संगठनात्मक और राजनीतिक समीकरण साधने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस वर्ष मार्च से जुलाई के बीच पांच बार सहारनपुर का दौरा कर चुके हैं। मार्च में उन्होंने मां शाकुम्भरी देवी के दर्शन के साथ मेले की व्यवस्थाओं की समीक्षा की थी। अप्रैल में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए थे। मई में देवबंद में विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया था। जून में उन्होंने मां शाकुम्भरी देवी क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया था और एक जुलाई को स्कूल चलो अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत के लिए सहारनपुर पहुंचे थे।
एक जुलाई के दौरे में मुख्यमंत्री ने अपने लगातार सहारनपुर आने का कारण बताते हुए कहा था कि यह उत्तर प्रदेश का अंतिम छोर वाला जनपद है और वह नहीं चाहते कि यहां के लोगों को यह महसूस हो कि मुख्यमंत्री उनकी अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने पिछली सरकारों के सहारनपुर दौरों को लेकर भी टिप्पणी की थी।इसके विपरीत अखिलेश यादव पिछले कुछ वर्षों में अपेक्षाकृत कम सहारनपुर आए हैं। उनका पिछला दौरा सात दिसंबर 2025 को निजी और सामाजिक कार्यक्रमों के सिलसिले में हुआ था। इससे पहले दो मई 2023 को उन्होंने नगर निगम चुनाव में सपा के मेयर प्रत्याशी नूर हसन मलिक के पक्ष में चुनाव प्रचार किया था।
सहारनपुर की राजनीति में इमरान मसूद और सपा के बीच रिश्ते भी महत्वपूर्ण हैं। नगर निगम चुनाव के बाद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक दूरी की चर्चा रही है। हाल में इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद के सपा में शामिल होने के बाद इन राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। शायान मसूद पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सहारनपुर से सात बार सांसद रहे काजी रशीद मसूद के पौत्र हैं।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राजनीति को लेकर भी सपा और रालोद के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है। अखिलेश यादव की ओर से जयंत चौधरी को लेकर की गई पूर्व की राजनीतिक टिप्पणियों के बाद दोनों दलों के बीच तल्खी की चर्चा रही है। ऐसे में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के लगातार दो दिनों में सहारनपुर जिले में होने वाले कार्यक्रमों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि अखिलेश यादव अपने सहारनपुर दौरे के जरिए सपा के संगठन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को कितना साध पाते हैं तथा जयंत चौधरी का दौरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद के प्रभाव को मजबूत करने में कितना कारगर रहता है।