
सहारनपुर, 1 सितंबर। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के सदर मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख डा. मोहन भागवत के न्यूयार्क में शनिवार को दिए विचारों की सराहना करते हुए कहा कि जरूरत इस बात की है कि डा. भागवत अमेरिका और कनाडा में अपनी सभाओं में व्यक्त किए जा रहे अच्छे विचारों को भारत में भी अपने कार्यकर्ताओं पर लागू कराएं। इससे देश में आपसी सौहार्द और राष्ट्रीय एकता की भावना को वास्तविक मजबूती मिलेगी।मौलाना मदनी ने कहा कि उन्होंने 30 अगस्त 2019 को दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ कार्यालय केशवकुंज में डा. मोहन भागवत से मुलाकात कर उनसे लंबी वार्ता की थी। इस दौरान उन्होंने आपसी सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और मॉब लिंचिंग सहित कई मुद्दे उठाए थे। यह मुलाकात संघ के तत्कालीन राष्ट्रीय संपर्क प्रमुख रामलाल ने कराई थी।
उन्होंने कहा कि न्यूयार्क में 29 अगस्त को डा. भागवत ने यह बात बिल्कुल सही कही कि हिंदुत्व कभी अलगाववादी और बहिष्कारवादी नहीं रहा तथा जो हिंदू यह मानता है कि मुसलमानों को भारत से बाहर कर देना चाहिए, वह हिंदू नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि डा. भागवत ने यह भी कहा था कि प्रत्येक व्यक्ति की अपनी गरिमा होती है और ईश्वर तक पहुंचने के सभी रास्ते एक ही मंजिल की ओर ले जाते हैं।मौलाना मदनी ने आरोप लगाया कि भारत में हिंदू कट्टरपंथी मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ नफरत फैलाने, मॉब लिंचिंग, हिंसा और आर्थिक बहिष्कार जैसी गतिविधियों में शामिल हैं तथा मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन सवालों और मौजूदा परिस्थितियों पर डा. मोहन भागवत को अपने देश में गंभीरता से विचार करना चाहिए और ऐसे तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि डा. भागवत का एकता और भाईचारे का संदेश केवल विदेशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भारत में भी उसे सार्थक रूप से लागू किया जाना चाहिए।