
बिश्केक (किर्गिस्तान), 01 सितंबर। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने मंगलवार को कहा कि अगर अमेरिका 14-सूत्रीय सहमति पत्र के तहत अपने वादों को पूरा करता है, तो ईरान भी “तुरंत प्रतिक्रिया” देगा। इसके साथ ही उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो सप्ताह से भी कम समय में वाशिंगटन पर अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने का आरोप लगाया।
श्री पेज़ेश्कियन ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के 26वें शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान का अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों और संधियों को पूरा करने का एक “शानदार रिकॉर्ड” रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि एकतरफा कार्रवाई, सैन्य बल का प्रयोग, अवैध प्रतिबंध और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को नुकसान पहुंचा रही हैं।
श्री पेज़ेश्कियन ने ईरान पर हुए हालिया अमेरिकी और इजराइली हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा, “13 जून, 2025 और 28 फरवरी, 2026 को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूलभूत सिद्धांतों, अंतरराष्ट्रीय कानून, बल प्रयोग के निषेध के सिद्धांत और जीवन के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन थे।”
उन्होंने कहा कि ईरान, लेबनान, गाजा और पश्चिमी तट सहित पूरे पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों ने ताकत और दबाव पर आधारित दृष्टिकोण के खतरों को दर्शाया है। श्री पेज़ेश्कियन के अनुसार, ईरान पर हुए हमलों में मीनाब के एक स्कूल और फ़ार्स प्रांत के लामेरड में एक स्टेडियम पर हुए हमलों सहित बड़े पैमाने पर नागरिक हताहत हुए थे।
उन्होंने कहा, “ये 40 दिनों के युद्ध के पहले दिन के बड़े अपराधों के सिर्फ तीन उदाहरण थे। इस बर्बरता के बावजूद, ईरान के इस्लामिक गणराज्य ने अपने सशस्त्र बलों की ताकत और जनता के समर्थन के बल पर अमेरिका और कब्जाकारी शासन को भारी रणनीतिक शिकस्त दी।”
श्री पेज़ेश्कियन ने कहा कि ये हमले एक एससीओ सदस्य देश और एक प्राचीन सभ्यता पर हमला थे। उन्होंने उन सदस्य देशों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस आक्रामकता की निंदा की और तेहरान के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि 40 दिनों के ईरानी प्रतिरोध के बाद अंततः संघर्ष विराम हुआ और अमेरिका अपने पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रहा।
ईरानी राष्ट्रपति के अनुसार, इसके बाद पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई तीन महीने की बातचीत के परिणामस्वरूप 14-सूत्रीय सहमति पत्र तैयार हुआ था। उन्होंने कहा, “हालांकि, राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेज पर अमेरिकी प्रतिबद्धता दो सप्ताह से भी कम समय तक टिकी और उनका अपने वादों से मुकरना शुरू हो गया, जो अब भी जारी है।”
उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन का ईरान ने उसी तरीके से जवाब दिया है। लेकिन मैं स्पष्ट रूप से कह रहा हूं कि यदि अमेरिका सहमति पत्र में अपनी प्रतिबद्धताओं पर लौटता है, तो ईरान भी तुरंत वैसा ही जवाब देगा। अमेरिका के विपरीत, हमारा अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने का एक शानदार रिकॉर्ड रहा है।”
श्री पेज़ेश्कियन ने सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर एससीओ सदस्यों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया और कहा कि सुरक्षा और विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध और उभरती सुरक्षा चुनौतियों को क्षेत्र के मुख्य खतरे के रूप में रेखांकित किया।
ईरानी राष्ट्रपति ने एससीओ के भीतर कई आर्थिक पहलों का प्रस्ताव रखा, जिसमें गहरा वित्तीय व बैंकिंग सहयोग, एक ‘एससीओ बैंक’ की स्थापना, एक निर्यात और निवेश बीमा संघ और एक ‘एससीओ ऊर्जा कंसोर्टियम’ का गठन शामिल है।
सुरक्षा के मोर्चे पर, उन्होंने संगठन के भीतर एक ‘रणनीतिक सुरक्षा अध्ययन केंद्र’ बनाने का प्रस्ताव रखा, जो उभरते खतरों की पहचान करने और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए सिफारिशें दे सके।