
कानपुर, 02 सितंबर। कानपुर स्थित एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में चिकित्सकों की टीम ने ड्राई टिश्यू टेक्नोलॉजी से एओर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण (टीएवीआई) की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की है। संस्थान के अनुसार उत्तर प्रदेश में इस तकनीक से किया गया यह पहला टीएवीआई प्रोसीजर है।संस्थान के अनुसार कानपुर निवासी 70 वर्षीय राजेंद्र सिंह गंभीर बाइक्सपिड एओर्टिक वाल्व स्टेनोसिस और हार्ट फेलियर से पीड़ित थे। एओर्टिक वाल्व में गंभीर रुकावट के कारण उनके हृदय की पंपिंग क्षमता घटकर करीब 40 प्रतिशत रह गई थी। उन्हें सांस लेने में परेशानी और सीने में दर्द जैसी गंभीर समस्याएं थीं।
हृदय रोग संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अवधेश शर्मा ने बताया कि मरीज का एओर्टिक वाल्व दूरबीन विधि से पैर की नस के माध्यम से बदला गया। यह वाल्व ड्राई टिश्यू टेक्नोलॉजी पर आधारित था। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में वाल्व की औसत उम्र 15 से 20 वर्ष होती है, जबकि इसे खराब होने में वेट टिश्यू टेक्नोलॉजी के वाल्व की तुलना में अधिक समय लगता है।विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश्वर पांडेय ने बताया कि गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस से पीड़ित वृद्ध मरीजों, विशेषकर उच्च सर्जिकल जोखिम वाले मरीजों के लिए ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (टीएवीआई) एक उपयोगी उपचार विकल्प साबित हो रहा है। इस प्रोसीजर के बाद मरीज की हालत में तत्काल सुधार हुआ और उसे जल्द ही छुट्टी दे दी गई।
संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश वर्मा ने पूरी मेडिकल टीम को इस सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि संस्थान में एओर्टिक स्टेनोसिस के मरीजों का टीएवीआई तकनीक से सफलतापूर्वक उपचार किया जा रहा है। चिकित्सकों की टीम में डॉ. संतोष सिन्हा, डॉ. एमएमओ रजी, डॉ. मुकेश झा, डॉ. कुमार हिमांशु, डॉ. मोहित सचान और डॉ. प्रवीण शुक्ला शामिल रहे।