
चेपॉक, 12 सितंबर । देवदत्त पड़िक्कल को उम्मीद है कि घरेलू क्रिकेट में कप्तानी के अपने अनुभव से मिले आत्मविश्वास का उन्हें फायदा मिलेगा, जब वह आगामी चार दिवसीय मुकाबलों में पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ भारत की कप्तानी की शुरुआत करेंगे। पड़िक्कल ने 2025-26 रणजी ट्रॉफी में पंजाब के खिलाफ टीम के आखिरी लीग मुकाबले से पहले मयंक अग्रवाल से कर्नाटक की कप्तानी संभाली थी। अतिरिक्त जिम्मेदारी का उनकी बल्लेबाजी पर कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने सलामी बल्लेबाचज के तौर पर चौथी पारी में 85 गेंदों पर नाबाद 120 रन बनाए, जिससे कर्नाटक ने मोहाली में 250 रन का लक्ष्य महज 28 ओवर में हासिल कर लिया। इसके बाद उन्होंने नंबर 3 पर बल्लेबाजी करते हुए उत्तराखंड के साथ लखनऊ में खेले गए सेमीफाइनल में करियर का सर्वश्रेष्ठ 232 रन बनाया और कप्तान के तौर पर एक और प्लेयर ऑफ द मैच प्रदर्शन किया।पड़िक्कल ने गुरुवार को चेपॉक में दलीप ट्रॉफा फाइनल के बाद कहा, “निश्चित तौर पर, भारत ए टीम का कप्तान बनना एक शानदार मौका है। मैं इसका इंतजार कर रहा हूं। मुझे लगता है कि नेतृत्व करना ऐसी चीज है, जिसे मैं वास्तव में पसंद करता हूं, ख़ासकर पिछले साल कर्नाटक के साथ इसकी शुरुआत करने के बाद। मेरे लिए यह सीखने का एक शानदार अनुभव रहा, इसलिए मैं उस अनुभव को भारत ए के सेट-अप में भी आगे ले जाने को लेकर उत्साहित हूं। कप्तानी एक अतिरिक्त जिम्मेदारी है कि मैं मैदान पर जाकर यह सुनिश्चित करूं कि मैं टीम की मदद कर रहा हूं। मैंने हमेशा क्रिकेट इसी तरह खेला है। मैं हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि टीम जीते। कप्तान के तौर पर आपका एकमात्र लक्ष्य यही होता है। आप चाहते हैं कि टीम जीते। इससे मेरी बल्लेबाजी में और भी मदद मिलती है।”
बी साई सुदर्शन, जिनकी जगह पड़िक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीजी में ली थी, ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ दो मैचों की सीरीज के लिए फिर से फिट हैं और उन्हें पड़िक्कल का डिप्टी नियुक्त किया गया है।पड़िक्कल ने कहा, “मुझे लगता है कि भारतीय क्रिकेट में जगह को लेकर हमेशा कड़ी प्रतिस्पर्धा रही है। मेरे हिसाब से यह कभी कम नहीं हुई है और आगे भी ऐसी ही रहने वाली है। यह जरूरी है कि हम इस पर अधिक ध्यान न दें और बस अपनी बल्लेबाजी का आनंद लेते रहें। जब तक मैं रन बना रहा हूं, मैं खुश हूं।”
पड़िक्कल और साई सुदर्शन, दोनों ही स्पिनरों की ज़्यादातर गेंदों, यहां तक कि फुलर गेंदों को भी बैकफ़ुट पर जाकर खेलते हैं और इसमें सफल रहे हैं। इसी तरह की बल्लेबाजी करते हुए बड़े हुए पड़िक्कल इसे जोखिम नहीं मानते।हाल में दलीप फाइनल में भी पड़िक्कल ने पूर्वी क्षेत्र के ऑफस्पिनर एमडी कौनेन कुरैशी की फुलर गेंदों के खिलाफ पीछे रहकर खेलना पसंद किया और अपनी ताकत के मुताबिक बल्लेबाजी करते हुए रन बनाने के मौके बनाए।
पड़िक्कल ने कहा, “मुझे लगता है कि बैकफ़ुट पर खेलना मेरे लिए स्वाभाविक है। यह एक तकनीकी है और कुछ बल्लेबाज बैकफ़ुट पर अधिक खेलना पसंद करते हैं। मेरे लिए निजी तौर पर यह कोई जोखिम नहीं है और यह मेरे खेल का हिस्सा है। मैंने अपने पूरे करियर में ऐसा ही किया है। मेरे लिए यह कोई अलग चीज़ नहीं है। जो खिलाड़ी बैकफ़ुट पर ज़्यादा खेलने का आदी नहीं है, उसे यह जोखिम जैसा लग सकता है। लेकिन आखिर में आपको लगातार ख़ुद को ढालते रहना होता है। आपके खेल में कुछ ऐसी चीज़ें होंगी, जिन्हें लेकर आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप विपक्षी टीम को उनका फ़ायदा न उठाने दें। आपको उन पर काम करते रहना होगा, कोशिश करते रहना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि आपकी जो छोटी-मोटी कमियां हैं, आप उनके साथ कैसे तालमेल बिठा सकते हैं और उन्हें कैसे संभाल सकते हैं।”