गणेशोत्सव सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने वाला महापर्व: योगी

गणेशोत्सव सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने वाला महापर्व: योगी

लखनऊ, 14 सितंबर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी और विश्वकर्मा पूजा की कोटि-कोटि मंगलकामनाएं दीं हैं। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, जनजागरण और राष्ट्र के प्रति संकल्प को मजबूत करने वाला महापर्व है। वहीं भगवान विश्वकर्मा की पूजा हमें श्रम, कौशल और सृजन के सम्मान का संदेश देती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान गणेश का जीवन-दर्शन प्रकृति के संरक्षण और संतुलन का संदेश देता है। गणेश पूजन में प्रयुक्त होने वाले ‘एकविंशति पत्र’ यानी 21 प्रकार के पत्र औषधीय पौधों और वनस्पतियों के संरक्षण की भारतीय परंपरा की ओर भी संकेत करते हैं।

उन्होंने कहा कि पर्व-त्योहारों को प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ मनाया जाना चाहिए।

योगी ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव को सार्वजनिक स्वरूप देकर इसे आस्था से सामाजिक एकता और जनशक्ति से राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया था। आज भी गणेशोत्सव समाज को एकजुट करने और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का बोध कराने का अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा पूजन के अवसर पर प्रदेश के विकास और ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के निर्माण के संकल्प को और मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक गलियारे और नए औद्योगिक क्षेत्र प्रदेश की बढ़ती आर्थिक क्षमता और बदलते स्वरूप के प्रमाण हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कारीगरों, शिल्पकारों और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है। स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हुनर को नई तकनीक और बाजार से जोड़कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से ‘वोकल फॉर लोकल’ को केवल विचार न मानकर अपने व्यवहार का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को सम्मान और प्राथमिकता मिलने से कारीगरों को काम, युवाओं को रोजगार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

योगी ने कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, श्रम और कौशल के सम्मान तथा स्थानीय सामर्थ्य पर विश्वास के आधार पर उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित प्रदेश बनाया जा सकता है

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