
नयी दिल्ली 14 सितम्बर । चीन ने पिछले वर्ष भारत की उत्तरी सीमा से लगे इलाकों में सैनिकों की संख्या में कमी की है जबकि भारतीय सेना की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के सभी सेक्टरों में अभी भी मजबूत तैनाती है वहीं, पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद, घुसपैठ और संघर्ष विराम उल्लंघन के जरिए बड़ी सुरक्षा चुनौती बना रहा।रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में यह बात कही गयी है।
रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरी सीमा से लगते क्षेत्रों में चीन की सेना (पीएलए) की तैनाती में काफी कमी आयी है। एलएसी और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में करीब 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के बराबर चीनी सैनिक तैनात हैं। चीनी सैनिकों की संख्या घटने के बावजूद भारतीय सेना किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष के दौरान चीन के साथ लगातार राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य बातचीत से उत्तरी सीमा पर सकारात्मक बदलाव आये और स्थिरता की स्थिति बनी। ‘वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन’ की 33वीं और 34वीं बैठक पिछले वर्ष मार्च और जुलाई में हुई। सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी फिर शुरू हुई और दिसंबर 2024 तथा अगस्त 2025 में ये बैठकें हुईं।
तनाव में कमी का असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले वर्ष अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के लिए चीन यात्रा और 25-26 अक्टूबर को पूर्वी लद्दाख में हुई 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक में भी दिखा। रिपोर्ट के अनुसार, पीएलए के साथ सैन्यकर्मियों की बैठकें भी सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण माहौल में हो रही हैं।वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद से उत्तरी सीमा देश के सबसे संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्रों में रही है। इस दौरान दोनों तरफ सैनिकों की लगातार तैनाती और सैन्य ढांचे का बड़ा विस्तार हुआ। ताजा आकलन के मुताबिक, तत्काल सैन्य तनाव कम हुआ है, लेकिन एलएसी पर किसी भी नई चुनौती से निपटने के लिए भारतीय सेना की तैयारी मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट में पश्चिमी मोर्चे पर स्पष्ट आंकलन में पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा चुनौती का प्रमुख कारण बताया गया है।रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियानों में 19 आतंकवादियों को मार गिराया गया। इनमें आठ पाकिस्तानी आतंकवादी भी शामिल थे, जो कुल संख्या का करीब 40 प्रतिशत हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आंकड़ा जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध चलाने में पाकिस्तान की भूमिका को साफ तौर पर दिखाता है।
नियंत्रण रेखा पर भी पाकिस्तान की भूमिका सामने आयी है। पिछले वर्ष सेना ने जम्मू-कश्मीर में घुसने की कोशिश कर रहे 12 पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया। पिछले वर्षों के मुकाबले घुसपैठ की कोशिशें कम हुईं, लेकिन खतरे का स्वरूप बदल रहा है। आतंकवादी गतिविधियां अब अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर बढ़ रही हैं और इनमें नशीले पदार्थों तथा हथियारों और अन्य युद्ध सामग्री की तस्करी शामिल है।वर्ष 2025 में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाएं भी काफी बढ़ी हैं। भारतीय सेना ने 163 उल्लंघन दर्ज किए, जबकि 2024 में ऐसे केवल दो मामले हुए थे। इनमें से 124 उल्लंघन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए। यह अभियान 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने पर्यटकों की हत्या की थी।
पिछले वर्ष 10 और 12 मई को भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ स्तर की बातचीत के बाद नियंत्रण रेखा पर स्थिति में काफी स्थिरता आयी , हालांकि वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस शांति को खतरे का अंत नहीं माना जाना चाहिए और स्थिति अब भी अप्रत्याशित बनी हुई है।सेना के आकलन के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के लिए स्थानीय समर्थन जुटाने की पाकिस्तान की क्षमता में काफी कमी आयी है। पिछले वर्ष केवल एक स्थानीय युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है और वे सरकारी योजनाओं और नीतियों का बढ़ता लाभ उठा रहे हैं। इससे पाकिस्तान के स्थानीय आतंकवाद के दावे को भी कमजोर किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आम लोगों ने विकास का रास्ता चुना है और सरकारी तथा सेना की पहलों में बड़ी संख्या में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। सेना के अनुसार, इसका असर हिंसा में कमी, प्रदर्शनों में कमी और पत्थरबाजी की घटनाएं शून्य होने के रूप में सामने आया है।यह भी कहा गया है कि खतरा अब केवल घुसपैठ और छोटे हथियारों तक सीमित नहीं है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सेना ने पिछले वर्ष ड्रोन घुसपैठ की 863 घटनाएं दर्ज कीं। इनके जरिए नशीले पदार्थों, हथियारों और अन्य युद्ध सामग्री की तस्करी की कोशिशों का नया रूप सामने आया। सुरक्षा बलों ने इस दौरान 237 ड्रोन गिराये।
पहलगाम आतंकवादी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तनाव के बावजूद सेना ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में सुधार का असर आम लोगों की गतिविधियों में भी दिखा। वर्ष 2025 में केंद्र शासित प्रदेश में 2.3 करोड़ पर्यटक पहुंचे, जबकि श्री अमरनाथ यात्रा में 4.13 लाख श्रद्धालु शामिल हुए। सेना के अनुसार, यह सुरक्षा स्थिति को लेकर लोगों के बढ़ते भरोसे का संकेत है।