अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाया, भारत-चीन पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगने का जोखिम बढ़ा

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाया, भारत-चीन पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगने का जोखिम बढ़ा

वाशिंगटन, 16 सितंबर। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने उस विधेयक को आगे बढ़ा दिया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगाने का अधिकार देगा। इससे भारत और चीन जैसे प्रमुख खरीदारों पर उच्च शुल्क लगने का जोखिम बढ़ सकता है।

‘लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ ने 214-211 वोटों से एक प्रमुख प्रक्रियात्मक बाधा पार कर ली, जिसमें दो डेमोक्रेट सदस्यों ने भी रिपब्लिकन का समर्थन किया। प्रतिनिधि सभा में बुधवार को इस विधेयक पर अंतिम मतदान करने की उम्मीद है। प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप के विचारार्थ ह्वाइट हाउस भेजा जायेगा।सीनेट में सात अगस्त को 86-11 मत से पारित इस विधेयक का उद्देश्य रूस के राजनीतिक नेतृत्व, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले जहाजों के ‘शैडो फ्लीट’ पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाना है। यह ईरान पर मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंधों का भी विस्तार करता है।

शुल्क संबंधी प्रावधान राष्ट्रपति को रूस से आयातित कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के प्रमुख खरीदारों के साथ-साथ प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगाने का अधिकार देगा।सीनेट के मसौदे में व्यक्तिगत रूप से देशों का नाम लेने के बजाय संबंधित श्रेणियों में शीर्ष पांच आयातकों का उल्लेख किया गया है।

भारत-चीन रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए यदि शुल्क अधिकार का प्रयोग किया जाता है तो इस कानून के तहत वे संभावित लक्ष्य बन सकते हैं। विधेयक पारित होने मात्र से हालांकि भारत पर 100 प्रतिशत का शुल्क लागू नहीं हो जायेगा। यह केवल राष्ट्रपति को निर्दिष्ट परिस्थितियों में ऐसे शुल्क लगाने का अधिकार प्रदान करेगा।इस विधेयक को कुछ डेमोक्रेट सदस्यों की चिंताओं का सामना करना पड़ा है, जिनका मानना है कि यह राष्ट्रपति को अत्यधिक व्यापक शुल्क अधिकार प्रदान करता है।

प्रतिनिधि सभा की यह कार्रवाई गुरुवार से शुरू हो रहे शुरुआती संसदीय अवकाश से ठीक पहले हुई है। मध्यावधि चुनाव के बाद नौ नवंबर तक सांसदों के लौटने की उम्मीद नहीं है। इस समय सीमा ने अवकाश से पहले विधेयक पर विचार पूरा करने का दबाव बढ़ा दिया है। विधेयक का उद्देश्य रूसी ऊर्जा निर्यात से होने वाले राजस्व को निशाना बनाकर यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।प्रमुख खरीदारों पर जुर्माना लगाने से रूस को मिलने वाले राजस्व के प्रवाह में कमी आ सकती है, जबकि विरोधियों ने अमेरिकी व्यापारिक संबंधों पर व्यापक शुल्क शक्तियों के संभावित असर को लेकर चिंता जतायी है।

प्रतिनिधि सभा का यह कदम प्रतिबंध पैकेज पर महीनों की बातचीत के बाद आया है, जिसे मूल रूप से दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने आगे बढ़ाया था और बाद में उनके सम्मान में इसका नाम बदला गया।

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