
लखनऊ, 17 सितंबर। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संगठन को चुनावी तैयारी में जुट जाने का संदेश दिया है।दरअसल लखनऊ के ड्रीम वर्ल्ड रिसॉर्ट में हुई संघ-भाजपा समन्वय बैठक में विधानसभा क्षेत्रों की जमीनी स्थिति, सरकार के कामकाज और संगठन की तैयारियों को लेकर विस्तृत फीडबैक लिया गया। सूत्रों के अनुसार, बैठक में संघ की ओर से स्पष्ट किया गया कि अब संगठन के पदाधिकारी आपसी मनमुटाव और मतभेद को पीछे छोड़कर चुनाव की तैयारियों में जुटें। जमीनी स्तर से मिले फीडबैक के आधार पर भाजपा संगठन और सरकार के लिए कुछ सुझाव भी दिए गए।
बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने संघ पदाधिकारियों से उनके क्षेत्रों के विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी ली। संगठन की ताकत और कमजोरियों के साथ ही जनता के बीच सरकार, विधायकों और संगठन की स्थिति पर भी चर्चा हुई।सूत्रों के मुताबिक, संघ की ओर से बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को लेकर जनता के बीच व्यापक स्तर पर नकारात्मक नैरेटिव दिखाई नहीं देता। हालांकि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों को लेकर नाराजगी की बात सामने आई। कई स्थानों पर विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल नहीं होने का फीडबैक भी दिया गया।
बैठक में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी जमीनी स्तर की शिकायतों का उल्लेख किया गया। बताया गया कि कुछ क्षेत्रों में जनता से जुड़े काम समय पर नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। संघ ने सरकार और संगठन के स्तर पर इन समस्याओं के समाधान की जरूरत बताई।बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार सहित विभिन्न प्रांतों के प्रचारक मौजूद रहे। बैठक के बाद 2027 के चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और चेहरे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अभी सार्वजनिक तौर पर यह घोषणा नहीं की है कि विधानसभा चुनाव योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।
ऐसे में संघ की बैठक में हुई चर्चा को पार्टी की औपचारिक घोषणा के बजाय संगठनात्मक स्तर पर मिले संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में इस बात पर भी जोर रहा कि चुनावी तैयारियों को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए और जनता के बीच संगठन की सक्रियता बढ़ाई जाए। संघ और भाजपा के बीच समन्वय के साथ जमीनी फीडबैक के आधार पर आगे की रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी।