
नयी दिल्ली, 17 सितंबर । उद्योगमंडल एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने ऐप आधारित एकीकृत भुगतान प्रणाली ( यूपीआई) में बड़े बड़ी राशि वाले वाणिज्यिक लेन-देन पर नए शुल्क की नयी व्यवस्था की सराहना की है और कहा है कि इससे प्रणाली को निरंतर मजबूत और अद्यतन बनाए रखने में मदद मिलेगी और इन शुल्कों से कड़ो छोटे दुकानदरों और कारोबारियों पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा।श्री मिंडा ने एक बयान में कहा, “नयी व्यवस्था, इसमें नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, धोखाधड़ी कम होगी और इसे ज़्यादा लोग अपनाएंगे। यह व्यवस्था भुगतान अवसंरचना और भुगतान प्राप्त करने वाले नेटवर्क की सहायता करेगा, जिससे यूपीआई का और विस्तार हो सकेगा और देश भर में कंज्यूमर्स और बिज़नेस को सेवा मिल सकेगी।”
एसोचैम ने दो व्यक्तियों के बीच किसी भी राशि के यूपीआई से लेन-देन को पूरी तरह मुफ्त बनाये रखने तथा बाजार में 2,000 रुपये तक के भुगतान को एमडीआर से मुक्त रखने के सरकार के निर्णय को संतुलित बताया है। एसोचैम अध्यक्ष ने कहा, ‘ भारत में 3 करोड़ से ज़्यादा माइक्रो यूनिट्स हैं जिन्हें यूपीआई से लेन-देन के लिए कोई एमडीआर चार्ज नहीं देना होगा क्योंकि उनका मासिक कारोबार एक लाख रुपये से कम है। “एसोचैम ने कहा कि नयी व्यवस्था में योग्य छोटे दुकानदारों (जिनमें स्ट्रीट वेंडर और आस-पास के दुकानदार शामिल हैं, जो दो दुकानदारों के बीच के भुगतान की श्रेणी के तहत यूपीआई क्यूआर कोड के ज़रिए हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करते हैं) को शून्य एमडीआर का लाभ मिलेगा है। इससे उन्हें भुगतान से जुड़े अतिरिक्त खर्चों से बचाने में मदद मिलेगी।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत में 3 करोड़ से ज़्यादा माइक्रो यूनिट्स हैं जिन्हें यूपीआई लेनदेन के लिए कोई एमडीआर चार्ज नहीं देना होगा क्योंकि उनका मंथली टर्नओवर 1 लाख रुपये से कम है।एसोचैम अध्यक्ष ने कहा, ‘ यह फ्रेमवर्क यूपीआई की लगातार बढ़ोतरी में मदद करेगा और साथ ही इसकी पहुंच, इनोवेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मज़बूत करेगा। इससे डिजिटल पेमेंट का एक ज़्यादा टिकाऊ और समावेशी इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी।’