
नयी दिल्ली 19 सितंबर । अफगानिस्तान के अनुभवी लेग स्पिनर राशिद खान का मानना है कि उनके खिलाड़ियों के पास कौशल है, लेकिन भारत को हराने के लिए उन्हें बेहतर मानसिकता और स्वयं पर विश्वास करने की जरूरत है।क्रिकइंफो की रिपोर्ट के अनुसार राशिद ने कहा, “मुझे लगता है कि हमारे लिए सबसे अहम यह है कि हमें ख़ुद पर विश्वास रखना होगा कि हम भारत को हरा सकते हैं। हम उनसे इतनी ज़्यादा बार हार चुके हैं कि हमारे खिलाड़ियों के दिमाग़ में भी अब यही चलता है कि हम कभी इनसे जीते नहीं हैं और हमेशा संघर्ष ही करते रहे हैं। मुझे लगता है कि हमें चीज़ों को सिंपल रखना होगा, जितना आप अपने कौशल पर ध्यान केंद्रित करेंगे, आप बेहतर परिणाम लाएंगे।
उन्होंने कहा, “अगर आप इसी चीज़ को दिमाग़ में बार-बार दोहराएंगे कि हमने भारत को कभी हराया नहीं है, तो वह चीज़ आपको दबाव में लाएगी। इसलिए भविष्य में हमें अपना सिंपल गेम खेलना है, 100 प्रतिशत देना है और इस बात को दिमाग़ से निकाल देना है कि हम भारत से कभी जीते ही नहीं है। हम तभी ही बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे और तभी परिणाम आपके पक्ष में आ सकते हैं।”राशिद से जब पूछा गया कि क्या दोनों देशों के बीच यह केवल मानसिकता का अंतर है या कौशल में भी कहीं ना कहीं अफगानिस्तानी टीम पिछड़ रही है। तब उन्होंने कहा, “प्रमुखता यह मानसिकता का ही अंतर है। स्किल वाइज हम इससे और अधिक बेहतर नहीं हो सकते हैं। हमें सही समय पर सही निर्णय लेना होगा, जिसमें हम थोड़ा पीछे चल रहे हैं। मुझे लगता है कि हम सही समय पर सही निर्णय नहीं ले पाते हैं और थोड़ा इमोशनल होकर बल्लेबाज़ी में अपना विकेट दे देते हैं। ऐसा तभी होता है, जब हम चाहते हैं कि हम जल्दी से जल्दी मैच जीत लें, ना कि प्रोसेस को फ़ॉलो करके मैच जीते। तभी हम थोड़ा जबरदस्ती करते हैं और हमसे गलतियां हो जाती हैं।”उन्होंने कहा, “मेरे दिमाग में हमेशा यह रहता है कि मुझे टीम के लिए और रन बनाने की ज़िम्मेदारी मिले और मैं बल्लेबाजी क्रम में ऊपर जाऊं। मुझे लगता है कि मेरे पास वह स्किल है, लेकिन बाक़ी सब कुछ कोच और कप्तान पर निर्भर है। मैं बस इतना बता सकता हूं कि मैं अपनी बल्लेबाजी पर भी बहुत मेहनत करता हूं और यहां भारत आने से पहले मैंने अपने व्यक्तिगत बल्लेबाज़ी कोच नईम अमीन के साथ लंदन में बल्लेबाज़ी के तीन-चार अभ्यास सत्र किए थे। पहले मैं विकेट के स्क्वेयर खेलने की काफी कोशिश करता था, लेकिन अब मैं सीधा खेलने की अधिक कोशिश करता हूं। इसके लिए मैंने अपनी बल्लेबाज़ी तकनीक, शरीर के संतुलन और हेड पोजिशन पर भी काम किया है।”
उन्होंने कहा, ” मेरी कप्तानी में टीम विश्व कप के सेमीफाइनल तक पहुंची, हमने वेस्टइंडीज को भी हराया, लेकिन कभी-कभी चीज़ें आपके हाथ में नहीं होती और आप उस पर कंट्रोल नहीं कर सकते। लेकिन अब इससे मैं आगे बढ़ चुका हूं। कप्तान रहूं, ना रहूं लेकिन मुझे फर्क है कि मैं अफगानिस्तान के लिए खेल रहा हूं और जो भी मेरी स्किल और योग्यता है, मैं उसको सही तरीके से मैदान पर दिखाने की कोशिश कर रहा हूं। मेरे बस में केवल यही है कि मैं अफगानिस्तान के लिए अच्छा करूं और उन्हें मैच जितवाऊं।”उल्लेखनीय है कि भारत ही एकमात्र टीम है, जिसे अफगानिस्तान अभी तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हरा नहीं पाया है। गुरूवार को दिल्ली में संपन्न हुई तीन मैचों की टी-20 सीरीज में भी भारत ने 3-0 की आसान जीत दर्ज की। इससे पहले इस साल जून में हुए एकमात्र टेस्ट और तीन मैचों की वनडे सीरीज़ में भी भारत ने क्लीन स्वीप किया था।