
नयी दिल्ली, 24 सितंबर । सरकार ने दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर आगामी 15 अक्टूबर से प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) में विभिन्न हितधारकों का हिस्सा तय कर दिया है, और खास बात यह है कि इसमें सरकार को एक भी पैसा नहीं मिलेगा।आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि यूपीआई पर लगने वाले एमडीआर में से 40 प्रतिशत उस बैंक को जाएगा जिसमें भुगतान करने वाले ग्राहक का खाता है। भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी का जिस बैंक में खाता है या वह जिस भुगतान गेटवे का इस्तेमाल कर रहा है उसे 30 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। यूपीआई ऐप को 20 प्रतिशत और यूपीआई ऐप के बैंकिंग साझेदार को शुल्क में 10 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा।सूत्रों ने स्पष्ट किया कि न तो वित्त मंत्रालय को और न ही भारतीय रिजर्व बैंक को इसमें से एक भी पैसा मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने यूपीआई के जरिये 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट लेनदेन पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत (अधिकतम 300 रुपये) एमडीआर लगाने का आदेश जारी किया है। अनिवार्य सेवाओं जैसे रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि क्षेत्र में बीज, खाद आदि के लिए पांच रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का शुल्क तय किया गया है।पूंजी बाजार से संबंधित लेनदेन जैसे म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति और स्टॉक ब्रोकर और डीलरों के लिए एमडीआर की दर 0.02 प्रतिशत तय की गई है। इसमें भी अधिकतम शुल्क 300 रुपये की सीमा है। व्यक्तिगत से व्यक्तिगत यूपीआई खातों में लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यूपीआई से हर महीने एक लाख रुपये तक का लेनदेन करने वाले छोटे व्यापारियों को भी एमडीआर के दायरे से बाहर रखा गया है।
सूत्रों का कहना है कि यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का फैसला लंबे विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक यूपीआई के विस्तार, इसके लिए बुनियादी अवसंरचना तथा सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने, क्रेडिट ऑन यूपीआई, यूपीआई 123पे/फीचर फोन भुगतान और नयी भुगतान सेवाओं को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, थाईलैंड और अमेरिका जैसे देशों में पहले से त्वरित भुगतान प्रणालियों पर 1.99 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। भारत में भी क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से भुगतान करने पर एमडीआर की व्यवस्था पहले से है।