
पेरिस, 04 अक्टूबर । फ्रांस में शिक्षा संबंधी मांगों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन फैलता जा रहा है तथा प्रशासन ने अब तक 5000 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
एनपीआर की एक रिपोर्ट में फ्रांस के गृह मंत्रालय के हवाले से कहा गया कि अब तक 5,000 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें अधिकांश नाबालिग हैं।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार तक 400 से अधिक स्कूल और कॉलेज बंद रहे। प्रदर्शनों के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा भी हुई। शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने पत्रकारों से कहा कि शुक्रवार को 735 शिक्षण संस्थान किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए, जो गुरुवार की तुलना में 30 प्रतिशत कम है।
उन्होंने बताया कि प्रदर्शन से निपटने के दौरान आपातकालीन सेवाओं के तीन कर्मी घायल हुए, जबकि एक दिन पहले यह संख्या 31 थी। श्री गेफ्रे ने प्रदर्शन के दौरान हुई “अत्यधिक हिंसा की घटनाओं” की निंदा की।
पिछले कुछ दिनों से हजारों आक्रोशित छात्रों ने देशभर के हाई स्कूलों के प्रवेश और निकास को अवरुद्ध कर प्रदर्शन किया है। शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान दंगारोधी पुलिस के साथ झड़पें भी हुई हैं। ये प्रदर्शन ऐसे समय हो रहे हैं जब सरकार खर्च में कटौती वाले बजट को पारित कराने की कोशिश कर रही है और फ्रांस अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी कर रहा है।
शिक्षक संगठनों और कुछ राजनीतिक नेताओं ने भी छात्रों के साथ एकजुटता जताते हुए प्रदर्शनों में समर्थन दिया है। फ्रांसीसी सरकार ने छात्रों की कुछ मांगों को जायज बताया है लेकिन “शहरी हिंसा” की निंदा की है और वामपंथी पार्टी ‘फ्रांस अनबोड’ पर प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाया है। पार्टी ने इस आरोप से इनकार किया है।
मुख्य छात्र संगठनों में से एक के अनुसार, छात्र जर्जर बुनियादी ढांचे, कक्षाओं में अत्यधिक भीड़, जरूरत से अधिक पढ़ाई के कार्यक्रम, शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी तथा स्कूलों के लिए अपर्याप्त धन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ छात्र उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए इस्तेमाल होने वाले सरकारी प्रवेश प्लेटफॉर्म को समाप्त करने की भी मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था अनुचित रूप से चयनात्मक है।
इस सप्ताह पेरिस के उत्तर में स्थित कामकाजी वर्ग के इलाके सैं-सैं-डेनिस के एक स्कूल के बाहर लगे एक बैनर पर लिखा था, “हम खराब शिक्षित नहीं हैं, बस हमारी बात नहीं सुनी जाती।”
अधिकारियों के अनुसार, कई प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुए लेकिन बाद में प्रदर्शनकारियों द्वारा मोर्टार जैसे आतिशबाजी उपकरण चलाने और स्कूलों तथा अन्य बुनियादी ढांचे पर हमले के कारण हिंसक हो गये। इससे लाखों डॉलर की संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद श्री गेफ्रे ने स्कूलों में लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार कर छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय शिक्षकों की कमी से निपटने के लिए भी योजनाएं तैयार करेगा। छात्र संगठनों ने मंगलवार को फिर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है और राजनीतिक दलों तथा ट्रेड यूनियनों से भी इसमें शामिल होने की अपील की है।