
पेशावर, 05 अक्टूबर। जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के हजारों समर्थकों ने उनकी रिहाई और संवैधानिक एवं राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर इस्लामाबाद के लिए लंबा मार्च शुरू किया है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने सोमवार को यह जानकारी दी।
यह मार्च रविवार को पीटीआई शासित खैबर पख्तूनख्वा से शुरू हुआ। समर्थकों ने इस्लामाबाद पहुंचने से पहले कई स्थानों पर रुकने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं और उन्होंने युवाओं से अभियान में शामिल होने की अपील की है।
सरकार ने कहा है कि वह प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश की अनुमति नहीं देगी। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि राजधानी में व्यवस्था बाधित नहीं होने दी जाएगी। शहर के आसपास हजारों पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किये गये हैं।
प्रमुख मार्गों और सरकारी क्षेत्र के आसपास बैरिकेड के रूप में शिपिंग कंटेनर भी रखे गये हैं। इस क्षेत्र में संसद, प्रधानमंत्री आवास और विदेशी दूतावास स्थित हैं।
यह घटनाक्रम पीटीआई और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के बीच सप्ताहांत में वार्ता विफल होने के बाद सामने आया है। मार्च पहले 27 सितंबर को प्रस्तावित था, लेकिन सरकार द्वारा पीटीआई की मांगों पर बातचीत की पेशकश के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था।
श्री खान और पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व के बीच विवाद 2022 में संसद द्वारा उनकी सरकार गिराये जाने के बाद से जारी है। श्री खान ने अपनी सत्ता से बेदखली के लिए सेना को जिम्मेदार ठहराया था, जबकि सेना ने इस आरोप से इनकार किया है।
मई 2023 में श्री खान की गिरफ्तारी के बाद हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिनमें समर्थकों ने सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था। इसके बाद हुई कार्रवाई में हजारों पीटीआई समर्थकों को हिरासत में लिया गया और कुछ को सैन्य अदालतों ने सजा सुनायी।
पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी श्री खान ने खुद को राजनीतिक कैदी बताया है। सेना और नागरिक सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए पाकिस्तान की न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हवाला दिया है। श्री खान को कई मामलों में दोषी ठहराया गया है, हालांकि उनकी एक को छोड़कर बाकी सजाएं निलंबित या रद्द हो चुकी हैं और इन मामलों में अपील लंबित हैं।
सरकार ने पीटीआई नीत खैबर पख्तूनख्वा सरकार पर अफगानिस्तान की सीमा से लगे प्रांत में बढ़ते आतंकवादी हमलों से निपटने की संघीय रणनीति में इस्लामाबाद के साथ सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगाया है।
पीटीआई ने वार्ता विफल होने के संबंध में इस्लामाबाद के स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया है। सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रांतीय प्रशासन संघीय आतंकवाद-रोधी नीति का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ संवैधानिक और कानूनी कदम उठाये जा सकते हैं।