बंगलादेश में गरीबी और असमानता बढ़कर 22.5 प्रतिशत हुई-विश्व बैंक

बंगलादेश में गरीबी और असमानता बढ़कर 22.5 प्रतिशत हुई-विश्व बैंक

ढाका, 08 अक्टूबर । बंगलादेश में लंबे समय से जारी आर्थिक सुस्ती, महंगाई, रोजगार की कमजोर मांग और ऊर्जा संकट के कारण गरीबी और आय असमानता बढ़ रही है।विश्व बैंक के अनुसार देश की राष्ट्रीय गरीबी दर 2022 के 18.7 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 22.5 प्रतिशत हो गयी है।

विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की ‘बंगलादेश डेवलपमेंट अपडेट’ रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में करीब 80 लाख अतिरिक्त लोग गरीबी में चले गए हैं। अकेले वित्त वर्ष 2026 में करीब 21 लाख लोग राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे पहुंचे।अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा तीन डॉलर प्रतिदिन के आधार पर अत्यधिक गरीबी की दर 2022 के 5.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में अनुमानित 10.1 प्रतिशत हो गयी। इसी अवधि में आय असमानता का गिनी गुणांक 30.9 से बढ़कर 34.9 हो गया।

विश्व बैंक ने कहा कि जीवन स्तर में गिरावट के प्रमुख कारण वास्तविक आय में कमी, ऊंची महंगाई, रोजगार वृद्धि में कमजोरी और आर्थिक वृद्धि में सुस्ती हैं। बैंक का अनुमान है कि 2027 में गरीबी दर बढ़कर 22.8 प्रतिशत हो सकती है।रिपोर्ट के अनुसार, 2001 में 48.9 प्रतिशत रही गरीबी दर 2022 तक घटकर करीब 18 प्रतिशत हो गयी थी, लेकिन इसके बाद यह रुझान पलट गया। वर्तमान में करीब 5.5 करोड़ लोग राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं, जबकि करीब 6.2 करोड़ लोग किसी आर्थिक झटके या प्रतिकूल परिस्थिति में गरीबी में जाने के जोखिम में हैं।

विश्व बैंक ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र की संरचनात्मक कमजोरियां, ऊर्जा संकट, घरेलू राजस्व संग्रह में कमी तथा सार्वजनिक और निजी निवेश में गिरावट भी अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही हैं। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं और चावल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अचानक वृद्धि कमजोर परिवारों की स्थिति और खराब कर सकती है।बैंक के अनुसार अगले वित्त वर्ष में करीब 6.3 लाख नए रोजगार सृजित हो सकते हैं, लेकिन इससे गरीबी में तेजी से कमी लाने में मदद नहीं मिलेगी। उसने यह भी चेतावनी दी कि जलवायु संबंधी जोखिमों के कारण 2050 तक बंगलादेश में करीब 1.3 करोड़ लोग विस्थापित हो सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से लोगों के गरीब हो जाने के बाद सहायता देने पर केंद्रित है, जबकि गरीबी में गिरने से पहले कमजोर परिवारों को संरक्षण देने वाली व्यवस्थाएं अपेक्षाकृत कमजोर हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Designed and Developed by Prakhar Dixit