
प्रयागराज, 14 अक्टूबर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बुधवार को करीब तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने के शासनादेश को वैध मानते हुए उसे चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं।मामला ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने से संबंधित था। याचिकाकर्ताओं ने प्रशासकों की नियुक्ति और संबंधित कानूनी प्रावधानों की वैधता को चुनौती दी थी। अदालत ने शासनादेश को वैध मानते हुए निर्देश दिया कि प्रशासक अगले तीन महीने तक अपने पद पर बने रहेंगे और इस अवधि में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाए।
अदालत ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग अपना काम जारी रखेगा और उसके कामकाज में कोई बाधा नहीं आएगी। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया आयोग के कामकाज पर निर्भर नहीं रहेगी। चुनाव मौजूदा नियमों और व्यवस्था के तहत कराए जाएंगे तथा 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का पालन किया जाएगा।पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियों को लेकर अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन ने दलील दी थी कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के तहत पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक की तारीख से अधिकतम पांच वर्ष निर्धारित है। ऐसे में निर्धारित समय के भीतर चुनाव कराना आवश्यक है।
वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दलील दी गई थी कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12-बीबी के तहत प्रधान के सामान्य चुनाव या उपचुनाव की तारीख तय करने के लिए अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है। यह अधिसूचना राज्य निर्वाचन आयोग के परामर्श से जारी की जाती है।हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंचायत चुनाव की समय-सारिणी और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार तथा निर्वाचन आयोग की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, इस आदेश से आगामी विधानसभा चुनाव के समय पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।