
लखनऊ, 14 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने के निर्देश का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद चुनाव न कराना और निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाकर रखना भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पंचायत चुनाव टालकर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर रही थी। उसे आशंका थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनता का असंतोष चुनाव में उसके खिलाफ सामने आ सकता है और इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि ओबीसी आरक्षण का मुद्दा भी अत्यंत गंभीर है। हाई कोर्ट ने आरक्षण के लिए आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आगरा में तीन लाख से अधिक ओबीसी आबादी के मुकाबले आयोग के सामने केवल 179 लोगों के पहुंचने और महज 29 के बयान दर्ज होने की जानकारी पर अदालत ने चिंता जताई। यह स्थिति आरक्षण निर्धारित करने की प्रक्रिया की गंभीरता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार एक तरफ ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं कर रही और दूसरी तरफ चुनाव टाले गए । सवाल यह है कि क्या जानबूझकर आंकड़े जुटाने में देरी की गई और पंचायत चुनाव टालने का आधार तैयार किया ।क्या इससे पिछड़े वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कांग्रेस की मांग है कि हाई कोर्ट के निर्देशानुसार तीन महीने में पंचायत चुनाव कराए जाएं, ओबीसी आरक्षण के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय आंकड़े जुटाए जाएं तथा पिछड़े वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।