त्रिशा जॉली-गायत्री गोपीचंद और तन्वी की हार के साथ भारत की डेनमार्क ओपन में चुनौती समाप्त

त्रिशा जॉली-गायत्री गोपीचंद और तन्वी की हार के साथ भारत की डेनमार्क ओपन में चुनौती समाप्त

कोपेनहेगन, 18 अक्टूबर । महिला युगल में त्रिशा जॉली-गायत्री गोपीचंद और एकल में तन्वी शर्मा को हार का सामना करना पड़ा। इसी के साथ डेनमार्क ओपन 2026 बैडमिंटन टूर्नामेंट में भारत की चुनौती क्वार्टर फाइनल में समाप्त हो गई। शुक्रवार को हुए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में तन्वी शर्मा दुनिया की नंबर वन और टॉप सीड, दक्षिण कोरिया की एन से-यंग को नहीं हरा सकीं। वह 38 मिनट चले मुकाबले में 21-15, 21-13 से हार गईं।इससे पहले, महिला युगल में त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी—जिन्होंने इस साल की शुरुआत में बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था—मलेशिया की दूसरी सीड जोड़ी, पर्ली टैन और थिनाह मुरलीधरन से 14-21, 21-17, 21-11 से हार गई।

दुनिया की 18वें नंबर की जोड़ी, त्रिशा और गायत्री ने अच्छी शुरुआत की और पहले इंटरवल तक 11-7 की बढ़त बना ली, जिसके बाद उन्होंने आसानी से पहला गेम अपने नाम कर लिया।वर्तमान में पांचवें नंबर पर मौजूद मलेशियाई जोड़ी, दूसरे गेम की शुरुआत में भी पिछड़ रही थी और वापसी करने की कोशिश कर रही थी। त्रिशा और गायत्री ने 14-11 की बढ़त बना ली थी, लेकिन फिर कॉमनवेल्थ गेम्स की पूर्व चैंपियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता, पर्ली टैन और थिनाह मुरलीधरन ने शानदार वापसी करते हुए मैच को बराबरी पर ला दिया।

निर्णायक गेम में मलेशियाई खिलाड़ियों का दबदबा रहा और उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों को कोई मौका नहीं दिया कि वे कोई उलटफेर कर सकें। पर्ली टैन और थिनाह मुरलीधरन के खिलाफ 10 मुकाबलों में ट्रेसा और गायत्री की यह आठवीं हार थी। इसी महीने की शुरुआत में जापान में हुए एशियन गेम्स 2026 के क्वार्टर फाइनल से भी उन्हें इन्हीं मलेशियाई खिलाड़ियों ने बाहर किया था।वहीं, दुनिया की 24वें नंबर की खिलाड़ी तन्वी शर्मा ने मौजूदा वर्ल्ड और ओलंपिक चैंपियन एन से-यंग के खिलाफ अपने पहले मुकाबले में अच्छी शुरुआत की, लेकिन वह अपनी लय ज्यादा देर तक बरकरार नहीं रख सकीं। कोरियाई खिलाड़ी ने भारतीय युवा खिलाड़ी को आसानी से हरा दिया।

किदांबी श्रीकांत पुरुष एकल के दूसरे दौर तक पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें मौजूदा विश्व चैंपियन, फ्रांस के एलेक्स लैनियर से हार का सामना करना पड़ा।

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