वेस्टइंडीज का पुराना दबदबा लौट आया है: सैमी

वेस्टइंडीज का पुराना दबदबा लौट आया है: सैमी

बेंगलुरु, 18 अक्टूबर । भारत के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 श्रृंखला में वेस्टइंडीज टीम के प्रदर्शन से उत्साहित टीम मुख्य कोच डैरेन सैमी का मानना है कि वेस्टइंडीज का पुराना दबदबा लौट आया है।मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में सैमी ने यह बात कही। उन्होंने कहा, “यह इस बात का सही प्रतिबिंब है कि दोनों टीमों ने कैसा खेल दिखाया। मुझे पूरा यकीन है कि जब सीरीज शुरू हुई थी, तब शायद किसी को हमारे जीतने की उम्मीद नहीं थी। लेकिन वह दूसरों की राय थी।

उन्होंने कहा हम जीतना चाहते थे, क्योंकि भारत में हमने लंबे समय से ऐसा नहीं किया है। अगर हम जीत जाते, तो अच्छा लगता। हम पता है कि सफलता हमारे लिए क्या मायने रखती है। हम अपनी मौजूदा स्थिति और चुनौतियों को कभी हल्के में नहीं लेते। हम बस लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं और मुझे लगता है कि इस सीरीज़ के बाद हमने एक बड़ा क़दम उठाया है। हमने मौजूदा चैंपियन के खिलाफ खेला और उन्हें बराबरी की टक्कर दी। कुछ क्षेत्रों में तो हम उनसे बेहतर भी रहे।”सैमी को उम्मीद है कि मैदान पर टीम के बेहतर प्रदर्शन से वेस्टइंडीज क्रिकेट को आर्थिक मुश्किलों से उबरने और वित्तीय स्थिरता हासिल करने में मदद मिलेगी। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस डियरिंग के मुताबिक़, आज बोर्ड जिस आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा है, उसकी एक बड़ी वजह 1997 में लिया गया फ़ैसला है। उस साल आईसीसी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के वित्तीय मॉडल में बदलाव के लिए मतदान कराया था, जिसमें सीडब्ल्यूआई, जिसे उस समय डब्ल्यूआईसीबी कहा जाता था, दूसरे सदस्य बोर्डों के मुक़ाबले अल्पमत में रह गया था।

इस बदलाव के बाद द्विपक्षीय सीरीज से होने वाली पूरी कमाई मेजबान बोर्ड को मिलने लगी। वहीं, दौरा करने वाली टीमों को मिलने वाली फीस का सिलसिला बंद हो गया। इससे वेस्टइंडीज जैसे कम आबादी वाले क्षेत्रों के क्रिकेट बोर्ड को आमदनी का एक अहम ज़रिया गंवाना पड़ा, जो पहले उनकी वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद करता था।सैमी ने कहा, “आपने मुख्य कार्यकारी अधिकारी को 1997 में हुई उन घटनाओं के बारे में बात करते सुना होगा, जिनकी वजह से हम आज इस स्थिति में हैं। लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि वेस्टइंडीज़ क्रिकेट का मतलब सिर्फ़ इस क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और इस खेल के लिए भी क्या है। मैंने पुरानी वेस्टइंडीज टीमों के खिलाड़ियों के बारे में कहानियां सुनी हैं। वे किसी जगह पर तीन-चार महीने तक दौरा करते थे, अभ्यास मैच खेलते थे और अपने खेल से प्रतिभा का प्रदर्शन करते थे। इस दौरान वे प्रशंसक बनाते थे और कई लोगों के लिए कमाई के अवसर पैदा करते थे। मेरी मां हमेशा कहती हैं कि इंसान में दूसरों की परवाह करने का भाव होना चाहिए। ज़िंदगी में आप कुछ भी करें, यह भाव कभी नहीं खोना चाहिए। मुझे लगता है कि आज वेस्टइंडीज़ क्रिकेट को किसी ऐसे सहारे की ज़रूरत है, जो मुश्किल समय में उसके साथ खड़ा हो। आर्थिक तौर पर भी ऐसा सहारा ज़रूरी है। भारत में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम के खिलाफ इस तरह की सीरीज खेलने से हमें उस दिशा में आगे बढ़ने और अपनी बात रखने का बेहतर अवसर मिलता है।”सैमी ने कहा, “ड्रेसिंग रूम के सभी खिलाड़ियों ने मैदान पर उतरकर सकारात्मक इरादे के साथ क्रिकेट खेला। सबसे अच्छी बात यह रही कि टीम का पुराना दबदबा लौट आया है और आत्मविश्वास भी वापस आ गया है। इसकी शुरुआत विश्व कप के दौरान हुई थी। आप देख सकते थे कि खिलाड़ी खेल का आनंद ले रहे थे और उनमें जीतने की चाह थी। शुरुआत यहीं से होती है, इस विश्वास से कि हम इसी स्तर पर खेलने के हकदार हैं। फिर प्रदर्शन से भी यह साबित करना होता है कि हम यहां के हकदार हैं। उम्मीद है कि अब हम इस तरह का प्रदर्शन लगातार करते रहेंगे।”

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