भाजपा सांसद ने किया खंडहर में तब्दील लाल इमली का निरीक्षण

भाजपा सांसद ने किया खंडहर में तब्दील लाल इमली का निरीक्षण

कानपुर 22 अक्टूबर। अस्सी के दशक तक गर्म कंबल और अन्य ऊनी वस्त्रों के लिये विख्यात लाल इमली मिल आज खंडहर के रुप में तब्दील हो चुकी है हालांकि समय समय पर इस मिल के पुनरुद्धार के वादे किये जाते रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय सांसद रमेश अवस्थी ने मिल का निरीक्षण किया और यहां विकास एवं रोजगार के केंद्र के रुप में इसे संवारने की संभावनायें तलाशीं।रमेश अवस्थी लाल इमली पहुंचे और परिसर का निरीक्षण कर उसके पुनरुद्धार की संभावनाओं का जायजा लिया। उन्होंने लाल इमली सहित कानपुर की बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों के परिसरों को आईटी हब और अन्य रोजगारपरक परियोजनाओं के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया।

सांसद ने कहा कि कानपुर कभी देश की प्रमुख औद्योगिक नगरी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता था। यहां की मिलें हजारों परिवारों की आजीविका का आधार थीं। समय के साथ इन औद्योगिक इकाइयों का बंद होना न केवल शहर की औद्योगिक गतिविधियों के लिए नुकसानदेह रहा, बल्कि रोजगार के अवसरों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। अब आवश्यकता है कि इन परिसरों को केवल अतीत की औद्योगिक विरासत के रूप में देखने के बजाय भविष्य की आर्थिक संभावनाओं से जोड़ा जाए।उन्होंने कहा कि बंद मिलों की जमीन और परिसरों को लंबे समय तक अनुपयोगी छोड़ना उचित नहीं है। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए यहां आईटी हब, आधुनिक व्यावसायिक गतिविधियों और रोजगारपरक परियोजनाओं की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। इससे कानपुर को नई आर्थिक गति मिल सकती है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकते हैं।

सांसद ने बंद मिलों के पुनरुद्धार के लिए केंद्र एवं प्रदेश सरकार के स्तर पर समन्वित और ठोस पहल की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इस दिशा में केवल प्रस्तावों और चर्चाओं तक सीमित रहने के बजाय स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। इसके लिए एक विशेष कमेटी गठित करने, नोडल अधिकारी नियुक्त करने और प्रत्येक चरण के लिए समयसीमा निर्धारित करने की जरूरत है।उन्होंने यह भी जोर दिया कि पुनरुद्धार की राह में आने वाली कानूनी एवं प्रशासनिक अड़चनों की पहचान कर उनका समाधान निकाला जाए, ताकि परियोजनाओं को व्यावहारिक स्वरूप दिया जा सके। संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करके इन परिसरों के उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जाए और ठोस निर्णयों की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

रमेश अवस्थी ने स्पष्ट किया कि कानपुर की औद्योगिक विरासत को नई आर्थिक संभावनाओं में बदलना समय की मांग है। लाल इमली जैसे ऐतिहासिक परिसर का सुनियोजित उपयोग शहर के विकास, निवेश और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। निरीक्षण के दौरान लाल इमली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय सिंह तथा सीआईसी सुनील मिश्रा भी मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Designed and Developed by Prakhar Dixit