मतदाताओं को डराने, चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप के आरोपों पर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा

मतदाताओं को डराने, चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप के आरोपों पर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा

वाशिंगटन, 22 अक्टूबर। डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े संगठनों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर कर आरोप लगाया है कि वह मतदाता धोखाधड़ी के अपुष्ट दावों का इस्तेमाल राज्यों की चुनावी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करने तथा मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों को डराने के लिए कर रहा है।

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को दायर मुकदमे में न्यायाधीश से प्रशासन की कार्रवाई को गैरकानूनी घोषित करने और राज्यों के चुनाव संचालन में आगे किसी भी तरह के हस्तक्षेप पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।

संगठनों का आरोप है कि प्रशासन राज्य अधिकारियों पर संघीय एजेंसियों द्वारा तैयार मतदाता पंजीकरण सूचियों की समीक्षा करने का दबाव डाल रहा है। इन सूचियों में ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनके गैर-अमेरिकी नागरिक होने का संदेह है। उन्होंने सरकार पर इन सूचियों में नाम दर्ज मतदाताओं के मतपत्र खारिज करने की मांग करने और ऐसा करने से इनकार करने वाले चुनाव अधिकारियों को अभियोजन या जेल की धमकी देने का भी आरोप लगाया है।

मुकदमे में गृह सुरक्षा विभाग के उस दावे का उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार नेवादा में लगभग 16,000 गैर-अमेरिकी नागरिकों ने मतदान के लिए पंजीकरण कराया था। विभाग ने बाद में कहा कि उसने ऐसे 185 मामलों की पुष्टि की है। हालांकि, राज्य के रिकॉर्ड से बाद में पता चला कि ये सभी 185 लोग अमेरिकी नागरिक थे।

न्याय विभाग ने कथित तौर पर कैलिफोर्निया से संघीय सूची में शामिल 20,000 से अधिक संदिग्ध अपात्र मतदाताओं के मतपत्र खारिज करने को भी कहा था। लॉस एंजिलिस काउंटी के जांचकर्ताओं की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि सूची में शामिल 25 प्रतिशत से अधिक लोगों ने अपना जन्मस्थान अमेरिका बताया था, जबकि अन्य लोगों का मतदाता पंजीकरण पहले ही रद्द किया जा चुका था।

संगठनों के वकीलों ने मुकदमे में लिखा, “न्याय विभाग और गृह सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने देशभर में राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों को लगातार धमकियां देकर और डराकर अपने हस्तक्षेप के प्रयासों को मजबूत करने की कोशिश की है।”

उन्होंने तर्क दिया कि राज्य के कानूनों का पालन करने और पंजीकृत मतदाताओं को मतदान में मदद करने के लिए अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, जिसमें संभावित कारावास भी शामिल है, की धमकी देना डराने-धमकाने के समान है और मतदान अधिकार अधिनियम की धारा 11(बी) का उल्लंघन है।

मुकदमे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, न्याय विभाग और गृह सुरक्षा विभाग, दोनों विभागों के प्रमुखों तथा डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमेटी सहित डेमोक्रेटिक संगठनों को पक्षकार बनाया गया है। एक मतदाता को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।

न्याय विभाग ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि चुनावों की निष्पक्षता उसकी प्राथमिकता है और इस वर्ष के चुनावों की अखंडता सुनिश्चित करने के उसके प्रयास कानून के अनुरूप हैं।

एक्सियोस ने विभाग के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा, “हमने कैलिफोर्निया को सूचित किया था कि गैर-अमेरिकी नागरिकों के मतदान के लिए पंजीकृत होने की आशंका है। हमने राज्य से हमारी ओर से उपलब्ध कराई गई सूची में शामिल लोगों द्वारा डाले गए मतपत्रों के लिए स्वतंत्र रूप से नागरिकता की पुष्टि करने को कहा था। उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया।”

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