
लखनऊ, 24 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक के दौर में अपराधी तकनीक का कितना भी आवरण ओढ़ लें, प्रदेश की वैज्ञानिक जांच और विधिक क्षमता उन्हें खोज निकालेगी।
उन्होंने कहा कि एआई मददगार हो सकता है, लेकिन उसे निर्णायक नहीं बनना चाहिए। तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए, न कि मनुष्य पूरी तरह तकनीक पर निर्भर हो जाए।
मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम-2026’ के दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने देश के पहले ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ किया। यह केंद्र क्वांटम तकनीक, कानून और फॉरेंसिक विज्ञान के बीच समन्वय को बढ़ावा देगा।
उन्होंने कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल का लोकार्पण किया, ‘अभेद्य’ परियोजना की आधारशिला रखी और ‘एआई इन कंस्ट्रक्शन’ पुस्तक का विमोचन भी किया।
योगी ने कहा कि जिस करीब 100 एकड़ जमीन पर आज विश्वस्तरीय फॉरेंसिक संस्थान खड़ा है, उस पर कभी भू-माफिया का कब्जा था। वर्ष 2017 में मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच कराई गई और प्राथमिकी दर्ज होने पर कब्जाधारी ने आत्मसमर्पण कर जमीन छोड़ दी।
उन्होंने कहा कि पहले टेलीविजन धारावाहिक ‘सीआईडी’ में फिंगरप्रिंट या बाल के आधार पर अपराधियों तक पहुंचते दिखाया जाता था, लेकिन अब आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान की मदद से वास्तविक जीवन में भी ऐसा संभव हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने न्याय प्रक्रिया में वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व पर जोर देते हुए एक मामले का उल्लेख किया, जिसमें वर्ष 1980 में अपराध करने वाले व्यक्ति को साक्ष्यों की कमी और डीएनए नमूने नष्ट होने के कारण 2022 में सजा मिल सकी। उन्होंने कहा कि समय पर साक्ष्य जुटाना और उनका वैज्ञानिक परीक्षण न्याय में देरी कम करने के लिए जरूरी है।
योगी ने बताया कि प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें 12 प्रयोगशालाएं तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य अंतिम चरण में हैं। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन भी तैनात की गई हैं।
उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर विशेष जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश वर्ष 2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर समूह विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने नोएडा में सेमीकंडक्टर इकाई की स्थापना का भी उल्लेख किया।
औद्योगिक विकास का जिक्र करते हुए योगी ने दावा किया कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में 35 हजार नए उद्योग स्थापित हुए हैं।
योगी ने कहा कि राज्य के पास करीब 75 हजार एकड़ का भूमि बैंक और 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव हैं। उन्होंने बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेश के अनुकूल माहौल को इस बदलाव से जोड़ा।
सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्य, क्वांटम तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के न्यायिक एवं प्रशासनिक उपयोग पर चर्चा हुई।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि संस्थान अब तक पुलिस, रक्षा बलों और प्रशासन से जुड़े पांच हजार से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है।
सम्मेलन के दौरान शिक्षा, फॉरेंसिक विज्ञान, तकनीक और कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए।