
नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर । उच्चतम न्यायालय ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक मार्च के दौरान महिला पत्रकार को कथित तौर पर धक्का देने के मामले में दायर याचिका पर मंगलवार को नोटिस जारी किया।
पत्रकार ऋचा पाराशर ने अदालत परिसर में राजनीतिक प्रदर्शनों से जुड़े एक मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग करते हुए इस न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय की ओर इंडिया गठबंधन के नेताओं के मार्च के दौरान श्री गांधी ने उन्हें धक्का दिया था।
सुश्री पाराशर का आरोप है कि श्री गांधी ने उन्हें न्यायालय के गेट के पास उन्हें तेजी से धक्का दिया, जिससे वह गिर गईं, उनका फोन टूट गया और उनके पेट में दर्द होने लगा। उन्होंने दावा किया कि वह तीन महीने की गर्भवती हैं और उन्हें लगभग 40 मिनट तक कोई सहायता नहीं मिली और बाद में उन्हें सार्वजनिक अपमान तथा ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
श्री गांधी और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने अपनी याचिका में एफआईआर दर्ज करने, सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने, मुआवजे, माफी और अपने तथा अपने परिवार के लिए सुरक्षा की मांग की है।
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष इस आवेदन का उल्लेख किया, जिसके बाद पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।