कल्याणपुर में मेट्रो से सीवर तक विकास की रफ्तार, जलभराव और जाम अब भी चुनौती

कल्याणपुर में मेट्रो से सीवर तक विकास की रफ्तार, जलभराव और जाम अब भी चुनौती

कानपुर, 28 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कानपुर की कल्याणपुर विधानसभा में पिछले नौ वर्षों के विकास कार्यों और शेष नागरिक समस्याओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने यूनीवार्ता से विशेष बातचीत में कहा कि वर्ष 2017 के बाद क्षेत्र में सड़क, सीवर, परिवहन, पार्क और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में चौतरफा प्रगति हुई है। कानपुर मेट्रो की शुरुआत कल्याणपुर क्षेत्र में हुयी और रिकार्ड समय में इसका संचालन संभव हुआ जिसके चलते सड़क यातायात को सुचारु करने में मदद मिली। पार्कों के निर्माण से हरित क्षेत्र में बढोत्तरी हुयी,नतीजन प्रदूषण में उल्लेखनीय सुधार हुआ। गहरी सीवर लाइन से जलभराव की समस्या से काफी निजात मिली है और इस दिशा में अभी भी काम जारी है।

श्रीमती कटियार ने बताया कि कल्याणपुर क्षेत्र में कानपुर मेट्रो की शुरुआत विकास की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। आईआईटी कानपुर से मोतीझील तक मेट्रो सेवा 28 दिसंबर 2021 को शुरू हुई, जबकि 30 मई 2025 को इसका विस्तार कानपुर सेंट्रल तक किया गया। इससे शहर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन का विकल्प बढ़ा है। आने वाले समय में अनवरगंज-मंधना एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के निर्माण से क्षेत्र में जाम की समस्या से पूरी तरह निजात मिल सकेगी।उन्होने कहा कि पार्कों के निर्माण से हरित क्षेत्र में बढोत्तरी हुयी,नतीजन प्रदूषण में उल्लेखनीय सुधार हुआ। 2017 से पहले क्षेत्र में धूल के गुबार उड़ते थे और यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 के आसपास बना रहता था जबकि हरित क्षेत्र के विस्तार से अब क्षेत्र में एक्यूआई अधिकतर 72 से 100 के बीच में दर्ज किया जा रहा है।

विधायक ने क्षेत्र में करीब 80 किलोमीटर सीवर नेटवर्क के विस्तार का उल्लेख किया। उनका कहना है कि गहरी सीवर लाइन बिछने से जलभराव की समस्या में काफी राहत मिली है और इस दिशा में काम जारी है। हालांकि अभी भी कई बस्तियों में सीवर कनेक्शन की कमी, गंदे पानी की निकासी और बारिश के दौरान घरों में पानी भरने की शिकायतें बनी हुई हैं जिसके निराकरण का काम युद्धस्तर पर जारी है।जलनिकासी के लिए नवशीलधाम से मकड़ीखेड़ा नाले तक करीब 158.86 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और पहले चरण का काम भी शुरु हो चुका है। मकड़ीखेड़ा, गूबा गार्डन और आसपास के जलभराव प्रभावित इलाकों को राहत देना इसका उद्देश्य है। सड़क निर्माण और मरम्मत के क्षेत्र में भी विभिन्न कार्य कराए गए हैं। मुख्यमंत्री ग्रिड योजना के तहत बगिया क्रॉसिंग से केस्को कार्यालय तक सड़क निर्माण का काम लगभग पूरा हो चुका है और इसके नवंबर तक पूरा करने की उम्मीद है।

श्रीमती कटियार ने कहा कि क्षेत्र में पार्कों और सार्वजनिक स्थलों का विकास हुआ और करीब 250 पार्कों का सुंदरीकरण कराया गया जिनमें 140 पार्को में ओपन जिम लगाये गये हैं जहां बच्चे,महिलायें और बुजुर्ग स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इसके अलावा रतनपुर के छठ पूजा स्थल, सोमनाथ और आशादेवी मंदिरों के जीर्णोद्धार तथा प्राथमिक विद्यालयों को गोद लेकर उनमें सुधार कराया गया है। उन्होने दावा किया कि वह 2017 के बाद से अब तक लगभग हर रोज अपने कार्यालय में तीन से चार घंटे जनता दर्शन करती है जहां लोगों की समस्यायों का निराकरण प्रमुखता से होता है। अब तक वह एक लाख 56 हजार से अधिक लोगों की समस्यायों का समाधान करा चुकी हैं। जनता के संपर्क में रहना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है जिससे चुनाव के समय उन्हे अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता है।स्वास्थ्य सुविधाओं के संदर्भ में विधायक ने हैलट अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी वार्ड के निर्माण और जेके कैंसर अस्पताल में कोबाल्ट मशीन की व्यवस्था के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया। हैलट अस्पताल की ओपीडी में सालाना करीब 10 लाख मरीज पहुंचते है। इन संस्थानों का लाभ कल्याणपुर के अलावा कानपुर के अन्य क्षेत्रों और आसपास के जिलों के लोगों को भी मिलता है।

विकास कार्यों के बावजूद जलभराव कल्याणपुर की सबसे गंभीर नागरिक समस्याओं में बना हुआ है। मकड़ीखेड़ा, गूबा गार्डन, नानकारी, विनायकपुर, सरस्वती विहार, गुप्ता सोसाइटी और आवास विकास के निचले इलाकों में बारिश के दौरान पानी भरने की शिकायतें आम हो चुकी हैं। सीवर और गंदे पानी की समस्या भी कई मोहल्लों में नागरिकों के लिए परेशानी का कारण है। यातायात व्यवस्था में सुधार भी क्षेत्र की बड़ी चुनौती है। जीटी रोड से जुड़े गुटैया, गीतानगर, शारदानगर, गुरुदेव, कल्याणपुर और गूबा गार्डन के साथ आईआईटी रेलवे क्रॉसिंग के आसपास जाम की समस्या बताई गई है। रेलवे फाटक बंद होने, बाजारों की भीड़, सड़क किनारे अतिक्रमण और अव्यवस्थित वाहन स्टैंड से आवागमन प्रभावित होता है। मेट्रो सेवा शुरू होने के बावजूद स्थानीय सड़कों और क्रॉसिंगों पर यातायात प्रबंधन की जरूरत बनी हुई है।सड़कों की स्थिति और निर्माण के दौरान होने वाली परेशानी भी लोगों की शिकायतों में शामिल है। दयानंद विहार, आवास विकास और बगिया रोड सहित आसपास के इलाकों में क्षतिग्रस्त सड़कों और बाधित आवागमन की समस्याएं सामने आई हैं। आने वाले समय में क्षेत्र की प्रमुख कसौटी यह होगी कि स्वीकृत परियोजनाएं कब तक पूरी होती हैं और उनका लाभ कितनी बस्तियों तक पहुंचता है।

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