राम भारत की आत्मा और राष्ट्रीय चेतना के आधार: आनंदीबेन पटेल

राम भारत की आत्मा और राष्ट्रीय चेतना के आधार: आनंदीबेन पटेल

अयोध्या, 07 नवंबर। अयोध्या धाम में आयोजित भव्य दीपोत्सव-2026 समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रभु श्रीराम के आदर्शों को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और सुशासन का आधार बताते हुए कहा कि राम भारत की आत्मा हैं और हमारी राष्ट्रीय चेतना के आधार हैं।उन्होने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्ता से बड़ा कर्तव्य, अधिकार से बड़ा दायित्व और वैभव से बड़ा चरित्र है। रामराज्य की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब समाज में गरीब को सम्मान, वंचित को अवसर, महिलाओं को सुरक्षा, युवाओं को रोजगार और प्रत्येक नागरिक को न्याय प्राप्त होगा। शासन का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सुख, सुरक्षा और सम्मान पहुंचाना होना चाहिए।

राज्यपाल ने दीपोत्सव की दिव्य छटा का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या आज श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक चेतना के प्रकाश से आलोकित हो रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो आकाश के असंख्य तारे धरती पर उतरकर अयोध्या की पावन धरा को सुसज्जित कर रहे हों। प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या करोड़ों लोगों की अटूट आस्था, भारतीय संस्कृति की आत्मा और सनातन चेतना का जीवंत केंद्र है। यहां की मिट्टी के कण-कण में रामत्व का भाव समाहित है।उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण और गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया। श्रीराम केवल आराध्य नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के आधार हैं। रामराज्य न्याय, समानता, संवेदना, लोककल्याण और सुशासन पर आधारित समाज की परिकल्पना है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या अपनी प्राचीन आध्यात्मिक पहचान को आधुनिक विकास की नई ऊंचाइयों से जोड़ रही है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या से होटल, धर्मशाला, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प, फूल-माला और पूजा सामग्री से जुड़े हजारों परिवारों के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। अयोध्या की रामलीला, लोककला, संगीत, साहित्य और पारंपरिक खान-पान को भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।उन्होंने सरयू नदी को अयोध्या की जीवनधारा बताते हुए घाटों की स्वच्छता, नदी के निर्मल जल और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। कहा कि जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त वातावरण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। दीपोत्सव का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होगा, जब दीपों का प्रकाश प्रकृति संरक्षण और समाज के कल्याण का माध्यम बने।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। राज्यपाल ने युवाओं से प्रभु श्रीराम के जीवन से अनुशासन, नेतृत्व, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा सीखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को रामायण, महाभारत और भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराना जरूरी है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि किसी गरीब बच्चे की शिक्षा का दीप नहीं बुझने देंगे, किसी बेटी के सपनों को सीमित नहीं होने देंगे और किसी बुजुर्ग को अकेला नहीं छोड़ेंगे।उन्होंने कहा कि एक दीप से हजारों दीप प्रज्ज्वलित हो सकते हैं, लेकिन उसका प्रकाश कम नहीं होता। यही भारतीय संस्कृति की विशेषता है। हमारी खुशियों की रोशनी दूसरों के जीवन में भी आशा और प्रसन्नता का संचार करे, यही दीपावली का वास्तविक संदेश है।

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