
प्रयागराज,25 जनवरी । तीर्थराज प्रयाग में माघ मेला के दूसरे स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के अवसर पर गुरूवार को करीब दस लाख श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी के पवित्र जल में स्नान किया।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पौष पूर्णिमा के अवसर पर नौ लाख 80 हज़ार श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। दोपहर में धूप निकलने के बाद मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ में इजाफा हुआ। मेला प्रशासन की तरफ से लगातार लाउडस्पीकर पर श्रद्धालुओं को अपनों का हाथ पकड़कर चलने की हिदायत दी जा रही है।
घना कोहरा और कड़कड़ाती ठंड भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। श्रद्धालुओं ने ब्रह्ममुहूर्त से त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाना शुरू कर दिया। हालांकि सुबह अधिक ठंड और घने कोहरे के कारण श्रद्धालुओं का जमघट घाट पर अधिक नहीं रहा लेकिन बाद के समय में आस्था की डुबकी लगाने वाले बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिलाओं की भीड़ बढ़ गई। दोपहर में सूर्य भगवान के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली। कल्पवासी अपने-अपने शिविरों के बाहर निकल कर धूप सेंकना शुरू किया।
माघ मेला क्षेत्र में भारतीय संस्कृति का आदर्श वाक्य अनेकता में एकता और एकता में अनेकता परिलक्षित हो रहा है। सभी प्रकार की संकीर्णताओं से ऊपर उठकर श्रद्धालु अस्पृश्यता बोध से दूर निष्कपट मन से प्रेम और भक्ति जीवन का अभिन्न अंग मानकर अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। संगम किनारे श्रद्धालु आस्था की डोर से बंधे बिना किसी आमंत्रण और निमंत्रण पर हर साल एक निर्धारित तिथि पर पहुंच कर ठिठुरन भरी सर्दी में सुबह-शाम संगम स्नान करते हैं। रेती पर बने शिविर में कल्पवासी भौतिक सुख का त्याग कर आध्यात्मिक सुख के लिए संयम, अहिंसा, श्रद्धा और कायाशोधन का कल्पवास कर रहे हैं। संत-महात्मा भी संगम स्नान कर आध्यात्मिक सुख के लिए भगवान की भक्ति में लीन हैं।
श्रद्धालुओं संगम की त्रिवेणी में स्नान कर दान पुण्य कर रहे हैं। पौष पूर्णिमा के पावन पर्व पर संगम की त्रिवेणी में स्नान और दान का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि पौष पूर्णिमा पितरों की पूर्णिमा है और यह कल्याण पर्व है। इस मौके पर आस्था से लोग कल्याण की समस्त कामनाओं को लेकर लोग तीर्थराज प्रयाग आते हैं। इस दिन से ही संगम की रेती पर चलने वाले माघ मेले में कल्पवासी पितरों के मोक्ष और कामनाओं की पूर्ति का संकल्प लेकर कल्पवास की शुरुआत करते हैं। जो कि माघी पूर्णिमा के स्नान पर्व तक चलता है।
माघ मेले में आये कल्पवासी जीवन और मृत्यु के बंधनों से मुक्ति की कामना को लेकर अलौकिक शक्ति और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए संगम की रेती में एक माह तक कठिन जप और तप करना शुरू कर दिया है। पौष पूर्णिमा पर श्रद्धालु व्रत रखकर, स्नान, दान और पूजा-पाठ करते हैं जिससे परिवार में सुख-समृद्धि की बढ़ोत्तरी हो।
डीआइजी (माघ मेला) राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जल बैरिकेडिंग और जाल लगाए गए हैं। प्रशिक्षित गोताखोर, जल पुलिस, बाढ़ कंपनी, एसडीआरएफ के जवान, और एनडीआरएफ सभी मौके पर मौजूद हैं। पूरे इलाके की सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर हम ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जाएगा। महिला श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए बड़ी संख्या में महिला पुलिस तैनात की गई है। बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड, आरएएफ टीमें, एटीएस कमांडो और पुलिस के घोड़े सभी मौजूद हैं।
श्री मिश्र ने बताया कि उन्होंने कुछ साधु संतो से संवाद किया है जिससे पता चला है कि अयोध्या दर्शन कर कुछ संत महात्मा माघ मेला में पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके सुगम मार्ग की व्यवस्था की गयी है जिससे उन्हें अधिक दूर तक पैदल नहीं चलना पड़ा। उनके वाहनों के लिए विशेष पार्किंग की भी व्यवस्था की गयी है।