वैश्विक संकटों से उबरने में, भारत मार्गदर्शन देने में सक्षम : राष्ट्रपति

वैश्विक संकटों से उबरने में, भारत मार्गदर्शन देने में सक्षम : राष्ट्रपति

नयी दिल्ली 25 जनवरी । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जी-20 के भारत के अध्यक्षीय काल में वैश्विक दक्षिण की आवाज़ उठाने को असाधारण उपलब्धि बताते हुए आज कहा कि भारत दुनिया के अनेक हिस्सों में चल रहे संघर्षों और वैश्विक पर्यावरण संकट से उबरने में भी विश्व-समुदाय का प्रभावी मार्गदर्शन करने में सक्षम है।
               श्रीमती मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश में भारत की भूराजनीतिक एवं कूटनीतिक उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की अध्यक्षता में दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन एक अभूतपूर्व उपलब्धि थी। जी-20 से जुड़े आयोजनों में जनसामान्य की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इन आयोजनों में विचारों और सुझावों का प्रवाह ऊपर से नीचे की ओर नहीं बल्कि नीचे से ऊपर की ओर था। उस भव्य आयोजन से यह सीख भी मिली है कि सामान्य नागरिकों को भी ऐसे गहन तथा अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दे में भागीदार बनाया जा सकता है जिसका प्रभाव अंततः उनके अपने भविष्य पर पड़ता है। जी-20 शिखर सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में भारत के अभ्युदय को भी बढ़ावा मिला, जिससे अंतरराष्ट्रीय संवाद की प्रक्रिया में एक आवश्यक तत्व का समावेश हुआ है।
              राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के दौर में विश्व में अनेक स्थलों पर लड़ाइयां हो रही हैं और दुनिया के बहुत से हिस्से हिंसा से पीड़ित हैं। जब दो परस्पर विरोधी पक्षों में से प्रत्येक मानता है कि केवल उसी की बात सही है और दूसरे की बात गलत है, तो ऐसी स्थिति में समाधानपरक तर्क के आधार पर ही आगे बढ़ना चाहिए। दुर्भाग्य से, तर्क के स्थान पर, आपसी भय और पूर्वाग्रहों ने भावावेश को बढ़ावा दिया है, जिसके कारण अनवरत हिंसा हो रही है। बड़े पैमाने पर मानवीय त्रासदियों की अनेक दुखद घटनाएं हुई हैं, और हम सब इस मानवीय पीड़ा से अत्यंत व्यथित हैं। ऐसी परिस्थितियों में, हमें भगवान बुद्ध के सारगर्भित शब्दों का स्मरण होता है: “न हि वेरेन वेरानि, सम्मन्तीध कुदाचनम् , अवेरेन च सम्मन्ति, एस धम्मो सनन्तनो।” इसका भावार्थ है: “यहां कभी भी शत्रुता को शत्रुता के माध्यम से शांत नहीं किया जाता है, बल्कि अशत्रुता के माध्यम से शांत किया जाता है। यही शाश्वत नियम है।”
              उन्होंने कहा कि वर्धमान महावीर और सम्राट अशोक से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तक, भारत ने सदैव एक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि अहिंसा केवल एक आदर्श मात्र नहीं है जिसे हासिल करना कठिन हो, बल्कि यह एक स्पष्ट संभावना है। यही नहीं, अपितु अनेक लोगों के लिए यह एक जीवंत यथार्थ है। हम आशा करते हैं कि संघर्षों में उलझे क्षेत्रों में, उन संघर्षों को सुलझाने तथा शांति स्थापित करने के मार्ग खोज लिए जाएंगे।
              श्रीमती मुर्मू ने कहा कि वैश्विक पर्यावरण संकट से उबरने में भी भारत का प्राचीन ज्ञान, विश्व-समुदाय का मार्गदर्शन कर सकता है। भारत को ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा देने में अग्रणी योगदान देते हुए और वैश्विक जलवायु कार्रवाई को नेतृत्व प्रदान करते हुए देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता होती है। भारत ने पर्यावरण के प्रति सचेत जीवन-शैली अपनाने के लिए ‘लाइफ’ आंदोलन शुरू किया है। हमारे देश में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे का सामना करने में व्यक्तिगत व्यवहार-परिवर्तन को प्राथमिकता दी जा रही है तथा विश्व समुदाय द्वारा इसकी सराहना की जा रही है। हर स्थान के निवासी अपनी जीवन-शैली को प्रकृति के अनुरूप ढालकर अपना योगदान दे सकते हैं और उन्हें ऐसा करना ही चाहिए। इससे न केवल भावी पीढ़ियों के लिए पृथ्वी का संरक्षण करने में सहायता मिलेगी बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

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