किसान वही मांग रहे हैं, जिसका 2014 में मोदी ने किया था वादा: कांग्रेस

किसान वही मांग रहे हैं, जिसका 2014 में मोदी ने किया था वादा: कांग्रेस

नयी दिल्ली 20 फरवरी : कांग्रेस ने कहा है कि खेती बाड़ी छोड़कर मांगें मनवाने के वास्ते दिल्ली आने के लिए सड़कों पर उतरे किसान उसी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की मांग कर रहे हैं, जिसका वादा 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे किया था लेकिन अब वह मुकर कर रहे हैं।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्री मोदी अप्रैल 2014 में कह रहे थे कि एमएसपी किसानों का हक है, किसान भीख नहीं मांग रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री बनकर श्री मोदी किसानों से वादाखिलाफी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “पहले किसान आंदोलन में 700 से ज्यादा किसान शहीद हो गए लेकिन इनके कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अब फिर से किसान दिल्ली आना चाहते हैं। किसानों के ट्विटर हैंडल बंद करके भाजपा उनकी आवाज दबाना चाहती है। न्यूज चैनलों में भी किसानों की बात ख़त्म होती जा रही है- यह दबाव बनाने का तरीका है।”
श्री खेड़ा ने कहा, “कल 21 फरवरी को पंजाब में ‘जैतो दा मोर्चा’ मनाया जाता है। जब अंग्रेजों ने किसानों पर गोलियां चला कर काफी लोगों को मार दिया था, तब नेहरू जी वहां गए और किसानों को समर्थन दिया। ‘जैतो दा मोर्चा’ के कल 100 साल पूरे हो जाएंगे इसलिए श्री मोदी को नेहरू जी की शरण में जाना चाहिए और किसानों पर उनके विचार पढ़ने चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी को नेहरू जी से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।”
उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री’ नरेंद्र मोदी ही ‘प्रधानमंत्री’ नरेंद्र मोदी के सबसे बड़े आलोचक हैं। अब जैसे-जैसे श्री मोदी के झूठ सामने आ रहे हैं, वह इंटरनेट बंद करवा रहे हैं, हेडलाइन बदलवा रहे हैं। यहां तक कि प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो तथा आयकर विभाग से डराकर विपक्ष के नेताओं को अपनी तरफ कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस डरने वाली नहीं है, वह किसानों के हक के लिए खड़ी है।
कांग्रेस नेता ने पत्रकारों से कहा, “आप सभी श्री मोदी को समझाइए कि ये किसान दुश्मन नहीं हैं, ये वही मांग रहे हैं जिसका आपने 2014 से पहले वादा किया था। आपको प्रधानमंत्री से पूछना चाहिए कि वे किसानों की मांग क्यों नहीं सुन रहे हैं। क्या उनके ऊपर किसी औद्योगिक घराने या विदेशी लॉबी का दबाव है, वह इतना डरे हुए क्यों हैं।”

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