
चेन्नई, 2 मार्च । दुनिया के शीर्ष हाॅकी गोलकीपर में शुमार भारतीय टीम के पीआर श्रीजेश और वाॅलीबॉल के दिग्गज खिलाड़ी डेविड ली का मानना है कि खेल के मैदान पर सकारात्मक सोच किसी भी खिलाड़ी काे दवाब से निपटने में मदद कर सकती है।
रूपे प्राइम वॉलीबॉल लीग के तीसरे संस्करण के मौके पर श्रीजेश ने अमेरिकी खिलाड़ी और बेंगलुरु टॉरपीडो के मुख्य कोच डेविड ली के साथ लंबी बातचीत की। तीन बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके और टोक्यो ओलंपिक 2020 में देश को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले श्रीजेश ने अपने संघर्षो के बारे में खुल कर कहा “ गोलकीपिंग एक मानसिक खेल है। एक खिलाड़ी होने के नाते, हम समझते हैं कि हमें मैच में कैसे शामिल होना है लेकिन एक गोलकीपर होने के नाते, मैं बस पीछे खड़ा हूं और मेरा खेल मेरे दिमाग में है।”
उन्होंने कहा, “ एक युवा खिलाड़ी के रूप में, मेरी नकारात्मक भावनाएं मेरी सकारात्मक भावनाओं पर हावी हो जाती थीं और इसके कारण मुझे गोल खाने पड़ते थे। अब, मेरे अनुभव के साथ, मेरे लिए चीजें बदल गई हैं और मैं सकारात्मक विचारों को हावी होने देता हूं।”
ओलंपिक में तीन बार अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर अपनी टीम को स्वर्ण पदक और कांस्य पदक दिलाने वाले ली ने कहा “ हम सकारात्मक माहौल में पले-बढ़े हैं। हमारे पास ऐसे कोच नहीं थे जो हमें बताएं कि हम खेल में उतने अच्छे नहीं हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें आगे बढ़ना होगा और अनुकूलन करने का प्रयास करना होगा। आप नकारात्मक माहौल से अल्पकालिक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे तरीके लंबे समय तक टिकाऊ हैं।”
दबाव से निपटने में एक विशेषज्ञ के रूप में ली ने सलाह दी कि युवाओं को ओलंपिक से पहले सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियों से दूर रहना चाहिए और टूर्नामेंट को अपने खेल करियर में सिर्फ एक और दिन के रूप में लेने की कोशिश करनी चाहिए।
उन्होने कहा “ आप दिन-प्रतिदिन जो करते हैं उस पर भरोसा करें और इतना बड़ा भार न डालें।”द्रित किया जाए,” उन्होंने सलाह दी।
श्रीजेश ने कहा “ गोलकीपर की भूमिका के साथ आने वाली आलोचना से निपटना दुष्कर काम होता है। क्योंकि अगर मैंने 10 बचाव किए और एक गोल खाया, तो हर कोई उस एक गलती को याद रखेगा। लेकिन मैंने इसे स्वीकार कर लिया है और मैं इसके साथ आगे बढ़ गया हूं। इस पेशे ने मुझे अपने निजी जीवन में दबाव और आलोचना से निपटने में मदद की है।”
रुपे प्राइम वॉलीबॉल लीग की तारीफ करते हुये श्रीजेश ने कहा “ “मैं हमेशा यह देखने के लिए बहुत उत्सुक रहता था कि शीर्ष विदेशी खिलाड़ी कैसे खेल रहे हैं और वे कैसे प्रशिक्षण और व्यवहार करते हैं। पहले, मैं कभी भी अपने आहार, तैयारियों या प्रोटीन के बारे में परवाह नहीं करता था। मैं एक अच्छा श्रोता था, लेकिन कभी भी इस बारे में पहल नहीं करता था लेकिन लीग ने मुझे विदेशी खिलाड़ी से सीखने में मदद की और मुझे अपने खेल के इन सभी पहलुओं में सुधार करने में मदद की।”
डेविड ली ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वॉलीबॉल लीग भविष्य में भारत को इस खेल में ओलंपिक में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में विकसित करने में मदद करेगी। उन्होने कहा “ “मैं जानबूझकर प्रशिक्षण और सुधार के लिए सकारात्मक मानसिकता के साथ अभ्यास करने के बारे में बहुत बात करता हूं, न कि केवल पसीना बहाने और प्रशिक्षण में गेंद को इधर-उधर फेंकने के बारे में। मैं खिलाड़ियों से यह भी कहता हूं कि वे अनुकरण करने के लिए एक रोल मॉडल खोजें और उनके वीडियो देखें।”