
वाराणसी ,1सितंबर : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण के कार्य में मदद करेगी।
अपने एक दिवसीय दौरे पर काशी पहुंचे योगी पहली बार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय गए। इस दौरान वह विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक सरस्वती भवन में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों में “रास पंचाध्यायी”, श्रीमद्भगवद्गीता एवं विशेष कपड़े पर स्वर्ण अक्षरों एवं स्वर्ण कलाओं से युक्त दुर्गासप्तशती को देखकर भाव विभोर हो गए।
उन्होने भारतीय संस्कृति के धरोहर को संरक्षित करने के अभियान को निरन्तर जारी रखने तथा विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे इस प्रयास की प्रशंसा भी की। योगी ने भारत सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्य में प्रदेश सरकार के स्तर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
योगी ने 234 वर्षीय मुख्य भवन के अंदर का अवलोकन कर भारतीय नक्षत्र विद्या, भारतीय खगोल विद्या,भारतीय ऋषियों द्वारा किए गये कार्यों के ऊपर म्यूजियम बनाये जाने तथा शास्त्रार्थ की परम्परा को इसी भवन में कराये जाने का निर्देश दिया। भारतीय ज्ञान परम्परा के अति प्राचीन केंद्र सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन में वैदिक वांग्मय के क्रमिक विकास पर 3-डी म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा, जिसमें 16 संस्कारों, 64 कलाओं, 18 विद्या स्थान को विस्तृत रूप दिखाया जायेगा। निरीक्षण के दौरान सीएम योगी ने राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय,चौकाघाट को पुनः इस संस्था के संकाय के रूप में परिवर्तित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया।
मुख्यमंत्री के साथ कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा, उत्तर प्रदेश के स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल, आयुष एवं खाद्य सुरक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव उपस्थित रहे।