हिंदू भिक्षु चिन्मय दास की जमानत पर सुनवाई दो जनवरी को

हिंदू भिक्षु चिन्मय दास की जमानत पर सुनवाई दो जनवरी को

ढाका 03 दिसंबर। बंगलादेश में हिंदू भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की जमानत पर सुनवाई अगले साल दो जनवरी को पुनर्निर्धारित की गई है।
     बंगलादेश सम्मिलिता सनातनी जागरण जोते के प्रवक्ता चिन्मय दास की जमानत याचिका पर मंगलवार को चटगाँव में मेट्रोपॉलिटन सत्र न्यायाधीश मोहम्मद सैफुल इस्लाम की अदालत में सुनवाई होनी थी।
     चटगाँव बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट नाज़िम उद्दीन ने कहा,“चूंकि अभियोजन पक्ष ने समय याचिका प्रस्तुत की थी और चिन्मय का प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई वकील नहीं था, इसलिए अदालत ने जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख दो जनवरी तय की।”
     सम्मिलिता सनातनी जागरण जोत के नेता स्वतन्त्र गौरांग दास ब्रह्मचारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड बांग्लादेश को बताया कि चिन्मय की ओर से हलफनामा प्रस्तुत करने वाले वकील सुभाषी शर्मा पिछले कुछ दिनों से संपर्क में नहीं हैं।
     उन्होंने दावा किया,“उनके और उनके सहायकों, लगभग 70 वकीलों पर एक मामले में झूठा आरोप लगाया गया है और वे सभी गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपे हुए हैं।”
       श्री स्वतन्त्र ने आरोप लगाया,“राजनीतिक रूप से प्रेरित वकीलों के समूह की धमकियों और दबाव के डर से कोई भी वकील चिन्मय का प्रतिनिधित्व करने की हिम्मत नहीं कर रहा है।”
     इस बीच कोलकाता में इस्कॉन के वरिष्ठ अधिकारी राधारमण दास ने अपने एक्स अकाउंट पर वीडियो पोस्ट किए जिसमें वकीलों का एक समूह चिन्मय दास के लिए पेश होने वाले किसी भी व्यक्ति को खुलेआम धमकाता हुआ दिखाई दे रहा है। वकीलों को जोर से यह कहते हुए सुना गया कि जो कोई भी इस्कॉन के पूर्व पुजारी चिन्मय दास के लिए पेश होने की हिम्मत करेगा उसे अदालत की इमारत में पीटा जाएगा।
     श्री राधारमण दास ने यह भी पोस्ट किया कि जिस दिन चिन्मय दास को पहली बार गिरफ्तार किया गया और अदालत में पेश किया गया उस दिन उनके वकीलों में से एक रेगन आचार्य थे। उन्होंने तस्वीरों के साथ पोस्ट किया,“सुनवाई के बाद उनके चैंबर में तोड़फोड़ की गई और उन पर बेरहमी से हमला किया गया। जब चिन्मय कृष्ण दास को निशाना बनाया जा रहा है तो कोई भी वकील उनके लिए कैसे पेश हो सकता है।”
      उल्लेखनीय है कि गत 25 अक्टूबर को चिन्मय दास चटगाँव शहर में बंगलादेश सनातन जागरण मंच द्वारा आयोजित एक रैली के दौरान भगवा झंडा फहराकर बंगलादेश के राष्ट्रीय ध्वज का कथित रूप से अपमान करने के लिए देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था।
       इस्कॉन बंगलादेश के पूर्व प्रवक्ता को 25 नवंबर को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद से उनके अनुयायियों ने ढाका, चटगाँव और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया है।
     गत 26 नवंबर को चटगाँव की एक अदालत ने चिन्मय की जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें जेल भेज दिया। उनके समर्थकों के एक बड़े समूह ने उन्हें ले जा रही जेल वैन को लगभग ढाई घंटे तक रोके रखा। बाद में पुलिस ने ध्वनि ग्रेनेड फेंककर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया और चिन्मय को जेल ले गई।
        इस हंगामे के बीच हिंसा अदालत परिसर के सामने रंगम कन्वेंशन हॉल लेन में फैल गई। अधिवक्ता सैफुल इस्लाम अलिफ पर भीड़ ने जानलेवा हमला किया और उसे पीट-पीटकर मार डाला। सैफुल की हत्या के बाद कई लोगों ने इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जिसने चिन्मय से खुद को अलग कर लिया है।
       इस बीच भारत में इस्कॉन और चिन्मय के अनुयायी उनकी रिहाई की मांग को लेकर बांग्लादेश-भारत सीमा पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
     त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में सोमवार को बंगलादेश के सहायक उच्चायोग पर भीड़ ने हमला किया और चिन्मय की तत्काल रिहाई और बंगलादेश में ‘हिंदुओं पर हमलों को रोकने’ की मांग की।
       भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि बंगलादेश के सहायक उच्चायोग में परिसर में घुसपैठ बेहद खेदजनक है।
       बाद में बंगलादेश सरकार ने एक बयान में अगरतला में सहायक उच्चायोग के परिसर में हिंदू संघर्ष समिति के सदस्यों द्वारा किए गए जघन्य हमले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
       इस बीच सहायक उच्चायोग पर हमले की निंदा करते हुए विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन हुए जिसमें छात्रों ने ढाका विश्वविद्यालय के टीएससी, राजधानी में भारतीय उच्चायोग के सामने और बंगलादेश के अन्य स्थानों पर रैलियां निकालीं।

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