
नयी दिल्ली 20 मई । भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराई है।
दोनों देशोंं ने रक्षा साइबर, प्रशिक्षण और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के क्षेत्रों में सहयोग के समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।दक्षिण कोरिया की दो दिन की यात्रा पर गये रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को सोल में कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री आह्न ग्यू-बैक के साथ व्यापक द्विपक्षीय चर्चा की। दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की और उद्योग, उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, उभरती हुई तकनीकों, सैन्य आदान-प्रदान, रसद तथा क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और कोरिया के क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टिकोण के बीच बढ़ते मेल को मान्यता देते हुए एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिन्द प्रशांत क्षेत्र के साझा उद्देश्यों के अनुरूप रक्षा संबंधों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। रक्षा सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जो द्विपक्षीय साझेदारी के बढ़ते दायरे और गहराई को दर्शाते हैं।रक्षा साइबर के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने, भारत के राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज और कोरिया राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बीच प्रशिक्षण, और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना सहयोग पर समझौतों का आदान-प्रदान किया गया, जिससे साझेदारी मजबूत और बहुआयामी बन गई। रक्षा मंत्री ने कोरिया के रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन मंत्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की, और दोनों नेताओं ने मिलकर विकास, उत्पादन और निर्यात के रास्ते बनाने के प्रयास करने पर सहमति जताई। दोनों देशों के ‘इनोवेशन इकोसिस्टम’ को एक साथ लाने के लिए भारत-कोरिया रक्षा इनोवेशन एक्सेलेरेटर इकोसिस्टम की क्षमता का दोहन करने के रोडमैप पर चर्चा की गई।
बाद में श्री सिंह ने भारत-कोरिया रक्षा उद्योग व्यापार गोलमेज की अध्यक्षता की, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और रक्षा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधि एक साथ आए। इस बातचीत ने रक्षा निर्माण, सह-विकास, सह-उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी में नए अवसरों को तलाशने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।व्यापार जगत की प्रमुख हस्तियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने भारत के बढ़ते रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम और सरकार की पहलों के तहत उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य स्वदेशी रक्षा निर्माण और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देना है। उन्होंने कोरियाई रक्षा कंपनियों को भारतीय उद्योग के साथ संपर्क मजबूत करने और लंबे समय तक आपसी लाभकारी सहयोग में योगदान देने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत पहल में मिलकर अहम भूमिका निभाने के लिए कोरियाई और भारतीय कंपनियों के उत्साह की तारीफ़ की।
श्री सिंह ने कहा, “कमर्शियल सेक्टर में भारत-कोरिया इंडस्ट्रियल सहयोग की सफलता दोनों देशों के बीच लंबे समय तक भरोसेमंद पार्टनरशिप की बहुत बड़ी क्षमता को दिखाती है। अब इस सफल मॉडल को डिफेंस सेक्टर में भी बढ़ाने का समय आ गया है, जहाँ टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और स्ट्रेटेजिक भरोसा तेज़ी से आपस में जुड़ रहे हैं। कोरिया की टेक्नोलॉजिकल उत्कृष्टता, भारत के पैमाने, टैलेंट, मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और इनोवेशन क्षमताओं के साथ मिलकर सहयोग के लिए एक मज़बूत नींव बनाती है। साथ मिलकर, हमारे दोनों देश भविष्य के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और डिफेंस सिस्टम को मिलकर डेवलप और प्रोड्यूस कर सकते हैं। टेक्नोलॉजिकल रूप से सक्षम देशों के बीच भरोसेमंद पार्टनरशिप का बहुत ज़्यादा स्ट्रेटेजिक महत्व है। भारत और दक्षिण कोरिया इस बदलते ग्लोबल माहौल में मिलकर काम करने के लिए खास स्थिति में हैं।”