
नयी दिल्ली, 23 मई। कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को महंगाई के बोझ तले दबे आम लोगों पर दोहरी मार बताते हुए कहा है कि एक सप्ताह में पेट्रोल के दाम में पांच रुपये की वृद्धि कर जनता लूटा जा रहा है और सरकार परेशान लोगों को राहत देने के बजाय उनका बोझ बढ़ा रही है।कांग्रेस शोध विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राजीव गौड़ा तथा पार्टी नेता डॉली शर्मा ने शनिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के पार पहुंच रही है और रुपए की कीमत लगातार घट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने महज एक सप्ताह में पेट्रोल के दाम पांच रुपये बढ़ाकर आम आदमी पर चोट की है।
प्रोफेसर राजीव गौड़ा ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान जब कच्चे तेल की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल से अधिक थी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने सब्सिडी देकर जनता को राहत देने का प्रयास किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने के बावजूद मोदी सरकार ने इसका लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया और अब कीमतें बढ़ने पर पूरा बोझ जनता पर डाला जा रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार आत्मनिर्भरता की बात करती है, लेकिन भारत की निर्भरता आयातित कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस पर बढ़ी है। उन्होंने गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (जीएसपीसी) से जुड़े कथित घोटाले और उसके बाद ओएनजीसी में विलय का जिक्र करते हुए सरकार पर ऊर्जा क्षेत्र में विफल रहने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि उर्वरकों की लागत बढ़ने से किसानों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
पार्टी नेता डॉली शर्मा ने आरोप लगाया कि हर सुबह जनता को पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के बढ़े दामों का झटका मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल सस्ता नहीं हुआ और तेल कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया, जबकि आम लोगों को राहत नहीं मिली। उन्होंने दावा किया कि महंगाई के कारण खाद्य पदार्थों, सब्जियों और रसोई के सामान की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम परिवारों का बजट बिगड़ गया है।कांग्रेस नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि 2014 के बाद तेल कीमतों में आई गिरावट का लाभ जनता को क्यों नहीं दिया गया, ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने के लिए क्या कदम उठाए गए और बढ़ती महंगाई तथा आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए सरकार की क्या रणनीति है। पार्टी ने मांग की कि सरकार ईंधन मूल्य वृद्धि का बोझ खुद वहन करे और इसे आम जनता पर न डाले।