
नयी दिल्ली 25 मई । प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि सेना बदलाव के दौर से गुजर रही है और इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण को मज़बूत करना, संचालन तालमेल को बढ़ाना और भविष्य की युद्ध संबंधी ज़रूरतों के हिसाब से क्षमताएं विकसित करना है।जनरल चौहान ने सोमवार को यहां मानेकशॉ सेंटर में मुख्यालय , एकीकृत स्टाफ और सैन्य मामलों के विभाग के जूनियर कमीशन अधिकारियों (जेसीओ), अन्य रैंकों (अन्य) और सिविल स्टाफ़ को संबोधित करते हुए एकीकरण, आत्मनिर्भरता और नवाचार को सशस्त्र बलों में चल रहे बदलाव के मार्गदर्शक स्तंभ करार दिया।
इस संवाद के दौरान जनरल चौहान ने कहा कि भारतीय सेना बदलाव के ऐतिहासिक दौर से गुज़र रही है, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण को मज़बूत करना, ऑपरेशनल तालमेल को बढ़ाना और भविष्य की युद्ध संबंधी ज़रूरतों के हिसाब से क्षमताएं विकसित करना है।प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि केवल संस्थागत सुधारों से ही अपेक्षित बदलाव हासिल नहीं किया जा सकता और इस प्रक्रिया की सफलता हर स्तर पर मौजूद कर्मियों के समर्पण, पेशेवर रवैये और सक्रिय भागीदारी पर भी उतनी ही निर्भर करती है। उन्होंने सभी रैंकों और सिविल कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे नवाचार को अपनाकर, बेहतरीन कार्यप्रणालियों को साझा करके, तीनों सेनाओं में कार्यकुशलता व तालमेल को बेहतर बनाने के लिए तकनीक-आधारित समाधानों को अपनाकर एकीकरण की संस्कृति को बढ़ावा देने में अपना योगदान दें।
जनरल चौहान ने मौजूदा सुधारों को सैन्य कामकाज में एक नए युग की नींव रखने वाला ऐसा युग बताया जो ज़्यादा एकीकृत, चुस्त और आत्मनिर्भर होगा। उन्होंने सैन्य कर्मियों से आह्वान किया कि वे भविष्य की एक ऐसी तैयार सेना के विज़न के प्रति समर्पित रहें, जो लगातार जटिल होते जा रहे रणनीतिक माहौल में उभरती हुई सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।